Section 25R The Industrial Disputes Act, 1947

 


Section 25R The Industrial Disputes Act, 1947: 


 Penalty for closure.-

(1) Any employer who closes down an undertaking without complying with the provisions of sub- section (1) of section 25-O shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to five thousand rupees, or with both.

(2) Any employer, who contravenes 2 an order refusing to grant permission to close down an undertaking under sub- section (2) of section 25-O or a direction given under section 25P], shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one year, or with fine which may extend to five thousand rupees, or with both, and where the contravention is a continuing one, with a further fine which may extend to two thousand rupees for every day during which the contravention continues after the conviction.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 25R The Industrial Disputes Act, 1947: 

Excel Wear Etc vs Union Of India & Ors on 29 September, 1978

Workmen Of Meenakshi Mills Ltd.vs Meenakshi Mills Ltd. And Anr. Etc. on 15 May, 1992

S.G. Chemical And Dyes Trading vs S.G. Chemicals And Dyes Trading on 3 April, 1986

M/S. Cable Corpn. Of India Ltd vs Additional Commissioner Of on 16 May, 2008




औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25 त का विवरण - 

औद्योगिक विवाद (संशोधन) अधिनियम, 1976 के प्रारम्भ के पूर्व बन्द किए गए उपक्रमों को पुनः चालू करने के बारे में विशेष उपबन्ध-यदि किसी औद्योगिक स्थापन के, जिसे यह अध्याय लागू होता है, किसी उपक्रम के बारे में, जो औद्योगिक विवाद (संशोधन) अधिनियम, 1976 के प्रारम्भ के पूर्व बन्द किया गया है, समुचित सरकार की राय है कि-

(क) ऐसा उपक्रम नियोजक के नियंत्रण के परे की अपवर्जनीय परिस्थितियों के कारण से अन्यथा बन्द किया गया है;

(ख) उपक्रम के पुनः चालू किए जाने की संभावनाएं हैं;

(ग) ऐसे उपक्रम के बन्द किए जाने के पूर्व उसमें नियोजित कर्मकारों के पुनर्वास के लिए या जनसमुदाय के जीवन के लिए आवश्यक प्रदाय तथा सेवाएं बनाए रखने के लिए या दोनों के लिए उपक्रम को पुनः करना रहना आवश्यक है; और

(घ) उपक्रम के पुनः चालू करने के परिणामस्वरूप नियोजक को उस उपक्रम के सम्बन्ध में कष्ट नहीं होगा,

तो वह ऐसे नियोजक और कर्मकारों को अवसर देने के पश्चात्, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि उपक्रम ऐसे समय के भीतर (जो आदेश की तारीख से एक मास से कम न हो जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, पुनः चालू होगा ।



To download this dhara / Section of  The Industrial Disputes Act, 1947 in pdf format use chrome web browser and use keys [Ctrl + P] and save as pdf.

Comments

Popular posts from this blog

संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख | Characteristics of the Constitution of India

100 Questions on Indian Constitution for UPSC 2020 Pre Exam

भारतीय संविधान से संबंधित 100 महत्वपूर्ण प्रश्न उतर