Section 25Q The Industrial Disputes Act, 1947

 

Section 25Q The Industrial Disputes Act, 1947


Penalty for lay- off and retrenchment without previous permission.- Any employer who contravenes the provisions of section 25M or 1 of section 25N shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 25Q The Industrial Disputes Act, 1947: 

Ashok Kumar Jain vs State Of Bihar on 8 December, 1994

Workmen Of Meenakshi Mills Ltd. vs Meenakshi Mills Ltd. And Anr. Etc. on 15 May, 1992

Ashok Kumar Jain And Others vs The State Of Bihar And Others on 8 December, 1994

Mr. C. Gupta vs Glaxosmithklin Pharmaceutical  on 25 May, 2007

M/S. Empire Industries Ltd vs State Of Maharashtra & Ors on 17 March, 2010

Mr. C. Gupta vs Glaxo Smith Klin Pharmaceutical on 25 May, 2007



औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25ण का विवरण - 

उपक्रम बन्द किए जाने की प्रक्रिया-(1) कोई नियोजक, जो किसी ऐसे औद्योगिक स्थापन के, जिसे यह अध्याय लागू होता है, उपक्रम को बन्द करने का आशय रखता है, उपक्रम की आशयित बन्दी के कारणों का स्पष्टतया कथन करते हुए विहित रीति से, समुचित सरकार को उस तारीख से, जिसको आशयित बन्दी प्रभावी होनी है, कम से कम नब्बे दिन पूर्व, पूर्व अनुज्ञा के लिए आवेदन करेगा और साथ ही आवेदन की एक प्रति विहित रीति से कर्मकारों के प्रतिनिधि को भी तामील की जाएगीः

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे उपक्रम को लागू नहीं होगी जो भवनों, पुलों, सड़कों, नहरों, बांधों या अन्य सन्निर्माण काम के लिए स्थापित किया गया है ।(2) जहां उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा के लिए आवेदन किया गया है, वहां समुचित सरकार, ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे, और नियोजक, कर्मकार और ऐसे बन्द किए जाने में हितबद्ध व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, नियोजक द्वारा कथित कारणों की सच्चाई और पर्याप्तता, जनसाधारण के हितों और अन्य सभी सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, आदेश द्वारा और ऐसे कारणों सहित जो अभिलिखित किए जाएं, ऐसी अनुज्ञा दे सकेगी या अनुज्ञा देने से इंकार कर सकेगी और ऐसे आदेश की एक प्रतिलिपि नियोजक और कर्मकार को भेजी जाएगी ।

(3) जहां उपधारा (1) के अधीन आवेदन किया गया है और समुचित सरकार उस तारीख से, जिसको ऐसा आवेदन किया गया है, साठ दिन की कालावधि के भीतर नियोजक को अनुज्ञा या अनुज्ञा देने से इन्कार करने की सूचना नहीं देती है, वहां ऐसी अनुज्ञा, जिसके लिए आवेदन किया गया है, उक्त साठ दिन की कालावधि के अवसान पर दी गई समझी जाएगी ।

(4) अनुज्ञा देने या देने से इन्कार करने वाला समुचित सरकार का कोई आदेश, उपधारा (5) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, अंतिम होगा और वह सभी पक्षकारों पर आबद्धकर होगा और ऐसे आदेश की तारीख से एक वर्ष तक प्रवृत्त रहेगा ।

(5) समुचित सरकार चाहे स्वप्रेरणा पर या नियोजक या किसी कर्मकार द्वारा आवेदन किए जाने पर, उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञा देने या अनुज्ञा देने से इन्कार करने वाले आदेश का पुनर्विलोकन कर सकेगी या मामले को न्यायनिर्णयन के लिए अधिकरण को निर्दिष्ट कर सकेगीः

परन्तु जहां इस उपधारा के अधीन अधिकरण को निर्देश किया गया है, वहां वह ऐसे निर्देश की तारीख से तीस दिन की कालावधि के भीतर, अधिनिर्णय पारित करेगा ।

(6) जहां उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा के लिए आवेदन उसमें विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर नहीं किया गया है या जहां उपक्रम बंद करने के लिए अनुज्ञा देने से इंकार कर दिया गया है, वहां उपक्रम बंद करने की तारीख से उसका बन्द किया जाना अवैध समझा जाएगा और कर्मकार तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन सभी फायदों का हकदार होगा मानो उपक्रम बन्द ही नहीं किया  गया था ।

(7) इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी यदि समुचित सरकार का यह समाधान हो जाता है कि असाधारण परिस्थितियों के कारण जैसे कि उपक्रम में दुर्घटना या नियोजक की मृत्यु या इसी प्रकार की परिस्थितियों के कारण ऐसा करना आवश्यक है, तो वह आदेश द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि उपधारा (1) के उपबन्ध ऐसे उपक्रम के संबंध में ऐसी कालावधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, लागू नहीं होंगे ।

(8) जहां उपधारा (2) के अधीन किसी उपक्रम के बंद कर दिए जाने के लिए अनुज्ञा दी जाती है या जहां उपधारा (3) के अधीन बन्द कर दिए जाने के लिए अनुज्ञा दी गई समझी जाती है, वहां इस धारा के अधीन अनुज्ञा के लिए आवेदन की तारीख के ठीक पूर्व उस उपक्रम में नियोजित प्रत्येक कर्मकार प्रतिकर पाने का हकदार होगा जो निरन्तर सेवा के हर संपूरित वर्ष या छह मास से अधिक के उसके किसी भाग के लिए पन्द्रह दिन के औसत वेतन के बराबर है ।]


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