Section 25P The Industrial Disputes Act, 1947

 

Section 25P The Industrial Disputes Act, 1947: 


Special provision as to restarting of undertakings closed down before commencement of the Industrial Disputes (Amendment) Act, 1976 .- If the appropriate Government is of opinion in respect of any undertaking of an industrial establishment to which this Chapter applies and which closed down before the commencement of the Industrial Disputes (Amendment) Act, 1976 (32 of 1976 ),--

(a) that such undertaking was closed down otherwise than on account of unavoidable circumstances beyond the control of the employer;

(b) that there are possibilities of restarting the undertaking;

(c) that it is necessary for the rehabilitation of the workmen employed in such undertaking before its closure or for the maintenance of supplies and services essential to the life of the community to restart the undertaking or both; and

(d) that the restarting of the undertaking will not result in hardship to the employer in relation to the undertaking, it may, after giving an opportunity to such employer and workmen, direct, by order published in the Official Gazette, that the undertaking shall be restarted within such time (not being less than one month from the date of the order) as may be specified in the order.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 25P The Industrial Disputes Act, 1947: 

Workmen Of Meenakshi Mills Ltd. vs Meenakshi Mills Ltd. And Anr. Etc.on 15 May, 1992

The Pioneer Ltd. vs S. Tajdar Hussain (Dead) And Ors. on 3 April, 1972



औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25 ढ का विवरण - 

कर्मकारों की छंटनी के लिए पुरोभाव्य शर्तें-(1) किसी ऐसे औद्योगिक स्थापन में, जिसे यह अध्याय लागू होता है, नियोजित किसी कर्मकार की जो किसी नियोजक के अधीन कम से कम एक वर्ष की निरन्तर सेवा में रह चुका है, उस नियोजक द्वारा छंटनी तभी की जाएगी जब कि, -

(क) कर्मकार को तीन मास की लिखित ऐसी सूचना दे दी गई हो जिसमें छंटनी के कारण उपदर्शित किए गए हों और सूचना की कालावधि का अवसान हो गया हो या ऐसी सूचना के बदले में कर्मकार को सूचना की कालावधि के लिए मजदूरी का संदाय कर दिया गया हो; और

(ख) समुचित सरकार या ऐसे प्राधिकारी की, जो उस सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् विनिर्दिष्ट प्राधिकारी कहा गया है), पूर्व अनुज्ञा इस निमित्त किए गए आवेदन पर प्राप्त कर ली गई हो ।

(2) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा के लिए आवेदन नियोजक द्वारा विहित रीति से आशयित छंटनी के लिए कारण स्पष्ट रूप से बताते हुए किया जाएगा, और ऐसे आवेदन की एक प्रति की भी विहित रीति से संबंधित कर्मकारों पर साथ-साथ तामील की जाएगी ।

(3) जहां उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा के लिए कोई आवेदन किया गया है, वहां समुचित सरकार या विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे और नियोजक को अवसर देने के पश्चात्, संबंधित कर्मकार और ऐसी छंटनी में हितबद्ध व्यक्तियों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् नियोजक द्वारा कथित कारणों की सत्यता और पर्याप्तता को, कर्मकारों के हितों और सभी अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, आदेश द्वारा और उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसी अनुज्ञा दे सकेगा या देने से इंकार कर सकेगा और ऐसे आदेश की एक प्रतिलिपि नियोजक और कर्मकारों को भेजी जाएगी ।

(4) जहां उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा के लिए कोई आवेदन किया गया है और समुचित सरकार या विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, नियोजक को ऐसी तारीख से जिसको ऐसा आवेदन किया गया है साठ दिन की कालावधि के भीतर अनुज्ञा देने वाले या अनुज्ञा देने से इन्कार करने वाले आदेश को संसूचित नहीं करता है, वहां वह अनुज्ञा जिसके लिए आवेदन किया गया है, उक्त साठ दिन की कालावधि के अवसान पर दी गई समझी जाएगी ।

(5) समुचित सरकार या विनिर्दिष्ट प्राधिकारी का अनुज्ञा देने वाला या अनुज्ञा देने से इन्कार करने वाला आदेश, उपधारा (6) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए अंतिम होगा और संबंधित सभी पक्षकारों पर आबद्धकर होगा और ऐसे आदेश की तारीख से एक वर्ष के लिए प्रवृत्त रहेगा ।

(6) समुचित सरकार या विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, स्वप्रेरणा से या नियोजक या किसी कर्मकार द्वारा किए गए आवेदन पर, उपधारा (3) के अधीन अनुज्ञा देने वाले या अनुज्ञा देने से इन्कार करने वाले अपने आदेश का पुनर्विलोकन कर सकेगा या इस विषय को न्यायनिर्णयन के लिए किसी अधिकरण को, यथास्थिति, निर्दिष्ट कर सकेगा या करा सकेगाः

परन्तु जहां इस उपधारा के अधीन कोई निर्देश किसी अधिकरण को किया गया है, वहां ऐसे निर्देश की तारीख से तीस दिन की कालावधि के भीतर अधिनिर्णय करेगा ।

(7) जहां उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा के लिए आवेदन नहीं किया गया है या जहां किसी छंटनी के लिए अनुज्ञा देने से इन्कार कर दिया गया है, वहां ऐसी छंटनी को, ऐसी तारीख से जिसको कर्मकारों को छंटनी की सूचना दी गई थी, अवैध समझा जाएगा और कर्मकार उस समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन सभी फायदों का ऐसे हकदार होगा मानो उसे कोई सूचना नहीं दी गई थी ।

(8) इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी समुचित सरकार, यदि उसका समाधान हो जाता है कि ऐसी असाधारण परिस्थितियों जैसे उपक्रम में दुर्घटना या नियोजक की मृत्यु या उसी प्रकार की अन्य परिस्थितियों के कारण, ऐसा करना आवश्यक है तो वह आदेश द्वारा यह निदेश दे सकेगा कि उपधारा (1) के उपबन्ध ऐसे उपक्रम के संबंध में ऐसी कालावधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, लागू नहीं होंगे ।

(9) जहां उपधारा (3) के अधीन, छंटनी के लिए अनुज्ञा दी गई है या छंटनी की अनुज्ञा उपधारा (4) के अधीन छंटनी के लिए अनुज्ञा दी गई समझी जाती है, वहां ऐसा प्रत्येक कर्मकार जो इस धारा के अधीन अनुज्ञा के लिए किए गए, आवेदन की तारीख से ठीक पूर्व किसी स्थापन में नियोजित प्रत्येक कर्मकार, छंटनी के समय ऐसा प्रतिकर पाने का हकदार होगा जो निरंतर सेवा के सम्पूरित वर्ष या उसके ऐसे भाग के जो छह मास से अधिक हो, पन्द्रह दिन के औसत वेतन के बराबर होगा ।]



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