Section 25K The Industrial Disputes Act, 1947

 

Section 25K The Industrial Disputes Act, 1947: 

Application of Chapter VB.-

(1) The provisions of this Chapter shall apply to an industrial establishment (not being an establishment of a seasonal character or in which work is performed only intermittently) in which not less than 2 one hundred] workmen were employed on an average per working day for the preceding twelve months.

(2) If a question arises whether an industrial establishment is of a seasonal character or whether work is performed therein only intermittently, the decision of the appropriate Government thereon shall be final.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 25K The Industrial Disputes Act, 1947: 

S.G. Chemical And Dyes Trading vs S.G. Chemicals And Dyes Trading  on 3 April, 1986

Workmen Of Meenakshi Mills Ltd.vs Meenakshi Mills Ltd. And Anr. Etc. on 15 May, 1992

National Kamgar Union vs Kran Rader Pvt. Ltd. on 5 January, 2018

The Papnasam Labour Union vs Madura Coats Ltd. And Anr on 8 December, 1994

Papnasam Labour Union vs Madura Coats Ltd on 8 December, 1994

Pramod Jha & Ors vs State Of Bihar & Ors on 3 March, 2003

Orissa Textile And Steel Ltd vs State Of Orissa And Ors on 17 January, 2002

Rajinder Singh Chauhan & Ors vs State Of Haryana And Ors on 21 November, 2005

M/S. Empire Industries Ltd vs State Of Maharashtra & Ors on 17 March, 2010

Government Of India vs Workmen Of State Trading on 19 March, 1997




औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25 ञ का विवरण - 

इस अध्याय से असंगत विधियों का प्रभाव-(1) इस अध्याय के उपबन्ध किसी अन्य विधि में, जिसके अन्तर्गत औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 (1946 का 20) के अधीन बनाए गए स्थायी आदेश आते हैं, इनसे असंगत कोई बात होते हुए भी, प्रभावी होंगेः

 3[परन्तु जहां कि किसी अन्य अधिनियम के या उसके अधीन निकाले गए नियमों, आदेशों या अधिसूचनाओं के उपबन्धों के अधीन या किन्हीं स्थायी आदेशों के अधीन या किसी अधिनिर्णय या सेवा-संविदा के अधीन या अन्यथा, कोई कर्मकार किसी बात की बाबत ऐसे फायदों का हकदार है जो उसके लिए उन फायदों से, जिनका वह इस अधिनियम के अधीन हकदार होगा, अधिक अनुकूल है वहां, कर्मकार, इस बात के होते हुए भी कि वह अन्य बातों की बाबत इस अधिनियम के अधीन फायदा प्राप्त करता है, उस बात की बाबत अधिक अनुकूल फायदों का हकदार बना रहेगा ।]

(2) शंकाओं का निराकरण करने के लिए एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस अध्याय की किसी भी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह किसी राज्य में किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के उपबन्धों पर, वहां तक जहां तक कि वह विधि औद्योगिक विवादों के समझौते का उपबन्ध करती है, प्रभाव डालती है, किन्तु नियोजकों और कर्मकारों के अधिकार और दायित्व, वहां तक जहां तक कि उनका संबंध कामबन्दी और छंटनी से है, इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार अवधारित किए जाएंगे ।]



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