Section 25B The Industrial Disputes Act, 1947

 

Section 25B The Industrial Disputes Act, 1947: 

Definition of continuous service.- For the purposes of this Chapter,--

(1) a workman shall be said to be in continuous service for a period if he is, for that period, in uninterrupted service, including service which may be interrupted on account of sickness or authorised leave or an accident or a strike which is not illegal, or a lock- out or a cessation of work which is not due to any fault on the part of the workman;

(2) where a workman is not in continuous service within the meaning of clause (1) for a period of one year or six months, he shall be deemed to be in continuous service under an employer--

(a) for a period of one year, if the workman, during a period of twelve calendar months preceding the date with reference to which calculation is to be made, has actually worked under the employer for not less than--

(i) one hundred and ninety days in the case of a workman employed below ground in a mine; and

(ii) two hundred and forty days, in any other case;

(b) for a period of six months, if the workman, during a period of six calendar months preceding the date with reference to which calculation is to be made, has actually worked under the employer for not less than--

(i) ninety- five days, in the case of a workman employed below ground in a mine; and(ii) one hundred and twenty days, in any other case. Explanation.-- For the purposes of clause (2), the number of days on which a workman has actually worked under an employer shall include the days on which--

(i) he has been laid- off under an agreement or as permitted by standing orders made under the Industrial Employment (Standing Orders) Act, 1946 (20 of 1946 ), or under this Act or under any other law applicable to the industrial establishment;

(ii) he has been on leave with full wages, earned in the previous years;

(iii) he has been absent due to temporary disablement caused by accident arising out of and in the course of his employment; and

(iv) in the case of a female, she has been on maternity leave; so, however, that the total period of such maternity leave does not exceed twelve weeks.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 25B The Industrial Disputes Act, 1947: 

Employers In Relation To Digwadih vs Their Workmen on 22 March, 1965

Surendranagar District vs Dahyabhai Amarsinh on 25 October, 2005

Mohd. Ali vs The State Of Himachal Pradesh on 16 April, 2018

Surendra Kumar Verma Etc vs The Central Government on 23 September, 1980

The Divisional Manager, Apsrtc & vs P. Lakshmoji Rao & Ors on 22 January, 2004

M/S. U.P. Drugs & Pharmaceuticals vs Ramanuj Yadav & Ors on 23 September, 2003

Central Bank Of India vs S.Satyam & Ors on 31 July, 1996

K.V.Anil Mithra . vs Sree Sankaracharya Univ.Of  on 27 October, 2021

Workmen Of American Express vs Management Of American Express  on 28 August, 1985

Haryana State Coop Supply Mkt  vs Sanjay on 22 July, 2009



औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25 ख का विवरण - 

निरन्तर सेवा की परिभाषा-इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए-

(1) यह बात कि कर्मकार किसी कालावधि में निरन्तर सेवा में रह चुका है उस दशा में कही जाएगी जिसमें कि वह उस कालावधि में अविच्छिन्न सेवा में रहे, जिसके अन्तर्गत वह सेवा आती है जो रुग्णता या प्राधिकृत छुट्टी या दुर्घटना या ऐसी हड़ताल के कारण जो अवैध न हो या तालाबन्दी या काम के ऐसे बन्द हो जाने के कारण, जो कर्मकार के किसी कसूर की वजह से न हो, विच्छिन्न हो गई है ।

(2) जहां कि कर्मकार एक वर्ष या छह मास की कालावधि के लिए खण्ड (1) के अर्थ के अन्दर निरन्तर सेवा में नहीं रहा है, वहां-

(क) यदि उसने, उस तारीख से, जिसके प्रति निर्देश से गणना की जानी है, पूर्व के बारह कलैंडर मास की कालावधि के दौरान-

(i) ऐसे कर्मकार की दशा में जो खान में भूमि के नीचे नियोजित है एक सौ नब्बे से, तथा

(ii) किसी अन्य दशा में, दो सौ चालीस से,

अन्यून दिन, किसी नियोजक के अधीन वास्तव में काम किया है तो यह समझा जाएगा कि वह एक वर्ष की कालावधि के लिए, उस नियोजक के अधीन निरन्तर सेवा में रह चुका है ।

(ख) यदि उसने उस तारीख से, जिसके प्रति निर्देश से गणना की जानी है, पूर्व के छह कलैंडर मास की कालावधि के दौरान-

(i) ऐसे कर्मकार की दशा में जो खान में भूमि के नीचे नियोजित है, पच्चानवे से, तथा

(ii) किसी अन्य दशा में, एक सौ बीस से,

अन्यून दिन, किसी नियोजक के अधीन वास्तव में काम किया है तो यह समझा जाएगा कि वह छह मास की कालावधि के लिए, उस नियोजक के अधीन निरन्तर सेवा में रह चुका है;

स्पष्टीकरण-खंड (2) के प्रयोजनों के लिए, उन दिनों की, जिनको कर्मकार ने नियोजक के अधीन वास्तव में काम किया है, संख्या में वे दिन भी सम्मिलित होंगे, जिनको-

(i) उसकी किसी करार के अधीन या औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 (1946 का 20) के अधीन बनाए गए स्थायी आदेशों द्वारा या इस अधिनियम के अधीन या उस औद्योगिक स्थापन को लागू किसी अन्य विधि के अधीन यथा-अनुज्ञात कामबन्दी की गई है;

(ii) वह पूर्व वर्षों में उपार्जित पूरी मजदूरी वाली छुट्टी पर रहा है;

(iii)) वह अपने नियोजन से और उसके अनुक्रम में, उद्भूत दुर्घटना द्वारा कारित अस्थायी निःशक्तता के कारण अनुपस्थित रहा है; तथा

(iv) नारी की दशा में, वह प्रसूति छुट्टी पर रही है, किन्तु ये दिन ऐसे सम्मिलित होंगे कि ऐसी प्रसूति छुट्टी की कुल कालावधि बारह सप्ताह से अधिक न हो ।



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