Section 19 The Industrial Disputes Act, 1947

 

Section 19 The Industrial Disputes Act, 1947: 


Period of operation of settlements and awards.-

(1) A settlement 1 shall come into operation on such date as is agreed upon by the parties to the dispute, and if no date is agreed upon, on the date on which the memorandum of the settlement is signed by the parties to the dispute.

(2) Such settlement shall be binding for such period as is agreed upon by the parties, and if no such period is agreed upon, for a period of six months 2 from the date on which the memorandum of settlement is signed by the parties to the dispute], and shall continue to be binding on the parties after the expiry of the period aforesaid, until the expiry of two months from the date on which a notice in writing of an intention to terminate the settlement is given by one of the parties to the other party or parties to the settlement.

(3) 3 An award shall, subject to the provisions of this section, remain in operation for a period of one year 4 from the date on which the award becomes enforceable under section 17A]: Provided that the appropriate Government may reduce the said period and fix such period as it thinks fit: Provided further that the appropriate Government may, before the expiry of the said period, extend the period of operation by any period not exceeding one year at a time as it thinks fit so, however, that the total period of operation of any award does not exceed three years from the date on which it came into operation.

(4) Where the appropriate Government, whether of its own motion or on the application of any party bound by the award, considers that since the award was made, there has been a material change in the circumstances on which it was based, the appropriate Government may refer the award or a part of it 5 to a Labour Court, if the award was that of a Labour Court or to a Tribunal, if the award was that of a Tribunal or of a National Tribunal] for decision whether the period of operation should not, by reason of such change, be shortened and the decision of 6 Labour Court or the Tribunal, as the case may be] on such reference shall, 7 be final.

(5) Nothing contained in sub- section (3) shall apply to any award which by its nature, terms or other circumstances does not impose, after it has been given effect to, any continuing obligation on the parties bound by the award.

(6) Notwithstanding the expiry of the period of operation under sub- section (3), the award shall continue to be binding on the parties until a period of two months has elapsed from the date on which notice is given by any party bound by the award to the other party or parties intimating its intention to terminate the award.

(7) 1 No notice given under sub- section (2) or sub- section (6) shall have effect, unless it is given by a party representing the majority of persons bound by the settlement or award, as the case may be.]]



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 19 The Industrial Disputes Act, 1947: 

K.B. Daddarajjiappa & Ors vs State Of Karnataka & Ors on 16 January, 1989

The Patiala Central Cooperative vs The Patiala Central on 16 September, 1996

Cox & Kings (Agents) Ltd vs Their Workmen And Ors on 18 March, 1977

The Life Insurance Corporation Of vs D. J. Bahadur & Ors on 10 November, 1980

State Of Karnataka vs The Management Of Ksrtc & Anr on 18 February, 1999

Shukla Manseta Industries Pvt. vs The Workmen Employed Under It on 2 August, 1977

M. S. Shvananda vs Karnataka State Road Transport on 18 September, 1979

The Bharat Bank Ltd., Delhi vs Employees Of The Bharat Bank on 26 May, 1950

National Engineering Industries  vs State Of Rajasthan And Ors on 1 December, 1999

Indian Bank vs K. Usha & Anr. Etc. Etc on 28 January, 1998




औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 19 का विवरण - 

समझौतों और अधिनिर्णयों के प्रवर्तन की कालावधि-(1) 5॥। समझौता उस तारीख को, जिसके बारे में विवाद के पक्षकारों में सहमति हो जाए और यदि किसी तारीख के बारे में सहमति न हो तो उस तारीख को, जिसको, समझौता-ज्ञापन पर विवाद के पक्षकारों ने हस्ताक्षर किए हों, प्रवर्तन में आएगा ।

(2) ऐसा समझौता उतनी कालावधि के लिए, जितनी के बारे में पक्षकारों में सहमति हो जाए, और यदि ऐसी किसी कालावधि के बारे में सहमति न हो तो  [उस तारीख से, जिसको समझौता-ज्ञापन पर विवाद के पक्षकारों ने हस्ताक्षर किए हों,] छह मास की कालावधि के लिए आबद्धकर होगा और पूर्वोक्त कालावधि के अवसान के पश्चात् पक्षकारों पर तब तक आबद्धकर रहेगा जब तक उस तारीख से दो मास का अवसान न हो जाए जिसको समझौते के पक्षकारों में से कोई एक पक्षकार दूसरे पक्षकार या पक्षकारों को समझौते का पर्यवसान करने के आशय की लिखित सूचना देता है ।

7[(3) इस धारा के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए अधिनिर्णय, 8[उस तारीख से, जिसको अधिनिर्णय धारा 17क के अधीन प्रवर्तनीय होता है,] एक वर्ष की कालावधि के लिए प्रवर्तन में रहेगाः परन्तु समुचित सरकार उक्त कालावधि को घटा सकेगी और ऐसी कालावधि नियत कर सकेगी जैसी वह ठीक समझेः

परन्तु यह और कि समुचित सरकार प्रवर्तन की कालावधि के अवसान से पूर्व एक समय में एक वर्ष से अनधिक उतनी कालावधि जितनी वह ठीक समझे उक्त कालावधि में और बढ़ा सकेगी, किंतु ऐसे कि किसी अधिनिर्णय के प्रवर्तन की कुल कालावधि उसके प्रवर्तन में आने की तारीख से तीन वर्ष से अधिक न हो जाए ।

(4) जहां कि समुचित सरकार का, चाहे स्वप्रेरणा से या अधिनिर्णय से आबद्ध किसी पक्षकार के आवेदन पर, यह विचार हो कि जब से अधिनिर्णय दिया गया तब से उन परिस्थितियों में जिन पर वह आधारित है, तात्त्विक तब्दीली हो गई है, वहां समुचित सरकार, 9[यदि अधिनिर्णय श्रम न्यायालय का था तो श्रम न्यायालय को, या यदि अधिनिर्णय किसी अधिकरण या राष्ट्रीय अधिकरण का था तो अधिकरण को,] उस अधिनिर्णय या उसके भाग को यह विनिश्चच करने के लिए निर्देशित करसकेगी कि क्या ऐसी तब्दीली के कारण प्रवर्तन की कालावधि कम न कर दी जानी चाहिए, और ऐसे निर्देश पर, 1[यथास्थिति, श्रम न्यायालय या अधिकरण] का विनिश्चय 2॥। अन्तिम होगा ।

(5) उपधारा (3) में अन्तर्विष्ट कोई भी बात किसी ऐसे अधिनिर्णय को लागू नहीं होगी जो प्रभावी किए जाने के पश्चात् उन पक्षकारों पर, जो अधिनिर्णय से आबद्ध हैं, कोई चालू रहने वाली बाध्यता अपनी प्रकृति, निबन्धनों या अन्य परिस्थितियों के कारण अधिरोपित नहीं करता ।

(6) उपधारा (3) के अधीन प्रवर्तन की कालावधि का अवसान हो जाने पर भी अधिनिर्णय पक्षकारों पर तब तक आबद्धकर रहेगा जब तक कि उस तारीख से दो मास न बीत गए हों जिसको अधिनिर्णय से आबद्ध किसी पक्षकार ने दूसरे पक्षकार या पक्षकारों को अधिनिर्णय का पर्यवसान करने का अपना आशय प्रज्ञापित करने की सूचना दी हो ।

 3[(7) उपधारा (2) या उपधारा (6) के अधीन दी गई कोई भी सूचना तब तक प्रभावशील नहीं होगी जब तक कि वह, यथास्थिति, समझौते या अधिनिर्णय से आबद्ध व्यक्तियों की बहुसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाले पक्षकार द्वारा न दी गई हो ।


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