Section 12 The Industrial Disputes Act, 1947

 

Section 12 The Industrial Disputes Act, 1947: 

Duties of conciliation officers.-

(1) Where any industrial dispute exists or is apprehended, the conciliation officer may, or where the dispute relates to a public utility service and a notice under section 22 has been given, shall hold conciliation proceedings in the prescribed manner.

(2) The conciliation officer shall, for the purpose of bringing about a settlement of the dispute, without delay, investigate the dispute and all matters affecting the merits and the right settlement thereof and may do all such things as he thinks fit for the purpose of inducing the parties to come to a fair and amicable settlement of the dispute.

(3) If a settlement of the dispute or of any of the matters in dispute is arrived at in the course of the conciliation proceedings the conciliation

officer shall send a report thereof to the appropriate Government 1 or an officer authorised in this behalf by the appropriate Government] together with a memorandum of the settlement signed by the parties to the dispute.

(4) If no such settlement is arrived at, the conciliation officer shall, as soon as practicable after the close of the investigation, send to the appropriate Government a full report setting forth the steps taken by him for ascertaining the facts and circumstances relating to the dispute and for bringing about a settlement thereof, together with a full statement of such facts and circumstances, and the reasons on account of which, in his opinion, a settlement could not be arrived at.

(5) If, on a consideration of the report referred to in sub- section (4), the appropriate Government is satisfied that there is a case for reference to a Board, 2 Labour Court, Tribunal or National Tribunal,] it may make such reference. Where the appropriate Government does not make such a reference it shall record and communicate to the parties concerned its reasons therefor.

(6) A report under this section shall be submitted within fourteen days of the commencement of the conciliation proceedings or within such shorter period as may be fixed by the appropriate Government: 3 Provided that, 4 subject to the approval of the conciliation officer,] the time for the submission of the report may be extended by such period as may be agreed upon in writing by all the parties to the dispute.]


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 12 The Industrial Disputes Act, 1947: 

Christian Medical College  vs Christian Medical College  on 20 October, 1987

Christian Medical College vs Christian Medical College  on 20 October, 1987

P. Virudhachalam & Ors vs The Management Of Lotus Mills & Anr on 9 December, 1997

P. Virudhachalam & Ors vs The Management Of Lotus Mills & Anr on 9 December, 1997

Workers Of The Industry vs Management Of The  on 12 December, 1952

Express Newspapers (Private) vs The Union Of India And Others(And  on 8 January, 1958

Air India Statutory Corporation vs United Labour Union & Ors on 6 November, 1996

M/S. Lokmat Newspapers Pvt. Ltd vs Shankarprasad on 19 July, 1999

Jitendra Nath Biswas vs Empire Of India & Ceylone Tea Co. &  on 1 August, 1989

M/S. Lokmat Newspapers Pvt. Ltd vs Shankarprasad on 19 July, 1999




औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 12 का विवरण - 

सुलह अधिकारियों के कर्तव्य-(1) जहां कि कोई औद्योगिक विवाद विद्यमान है या उसके होने की आशंका है, वहां सुलह अधिकारी विहित रीति से सुलह कार्यवाहियां कर सकेगा या जहां कि विवाद किसी लोक उपयोगी सेवा के सम्बन्ध में हैं और धारा 22 के अधीन सूचना दे दी गई है, वहां वह ऐसी कार्यवाहियां विहित रीति से करेगा ।

(2) सुलह अधिकारी विवाद का समझौता कराने के प्रयोजन के लिए विवाद का तथा उसके गुणावगुण और उसके ठीक समझौता होने पर प्रभाव डालने वाले सभी मामलों का अन्वेषण अविलम्ब करेगा और विवाद का ऋजु तथा सौहार्दपूर्ण समझौता करने के लिए पक्षकारों को उत्प्रेरित करने के प्रयोजनार्थ वे सभी बातें कर सकेगा जिन्हें वह ठीक समझे ।

(3) यदि विवाद का या विवादग्रस्त मामलों में से किसी का भी समझौता सुलह कार्यवाहियों के अनुक्रम में हो जाता है, तो सुलह अधिकारी समुचित सरकार का 1[या समुचित सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारीट को उसकी रिपोर्ट, विवाद के पक्षकारों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता-ज्ञापन सहित भेजेगा ।

(4) यदि ऐसा कोई समझौता नहीं हो पाता है तो सुलह अधिकारी अन्वेषण समाप्त होने के पश्चात् यथासाध्य शीघ्रता से समुचित सरकार को पूरी रिपोर्ट भेजेगा, जिसमें विवाद से सम्बद्ध तथ्यों और परिस्थितियों का अभिनिश्चय करने और विवाद का समझौता कराने के लिए उसके द्वारा उठाए गए कदम, और साथ ही उन तथ्यों और परिस्थितियों का पूरा-पूरा विवरण और वे कारण भी, जिनसे उसकी राय में समझौता नहीं हो सका, उपवर्णित होंगे ।

(5) यदि उपधारा (4) में निर्दिष्ट रिपोर्ट पर विचार करने पर समुचित सरकार का समाधान हो जाए कि बोर्ड, 2[श्रम न्यायालय, अधिकरण या राष्ट्रीय अधिकरण] को निर्देश करने के लिए मामला बनता है तो वह ऐसा निर्देश कर सकेगी । जहां कि समुचित सरकार ऐसा निर्देश नहीं करती वहां वह उसके लिए अपने कारण अभिलिखित करेगी और सम्पृक्त पक्षकारों को संसूचित    करेगी ।

(6) इस धारा के अधीन रिपोर्ट, सुलह कार्यवाहियां प्रारम्भ होने के चौदह दिन के भीतर, या ऐसी अल्पतर कालावधि के भीतर, जैसी समुचित सरकार द्वारा नियत की जाए, निवेदित की जाएगीः

 3[परन्तु 4[सुलह अधिकारी के अनुमोदन के अध्यधीन रहते हुएट रिपोर्ट निवेदित करने का समय इतनी कालावधि के लिए बढ़ाया जा सकेगा जितनी के बारे में विवाद के सभी पक्षकारों में लिखित रूप में सहमति हो जाए ।


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