Section 78 CrPC

 

Section 78 CrPC in Hindi and English


Section 78 of CrPC 1973 :- 78. Warrant forwarded for execution outside jurisdiction - (1) When a warrant is to be executed outside the local jurisdiction of the Court issuing it, such Court may, instead of directing the warrant to a police officer within its jurisdiction, forward it by post or otherwise to any Executive Magistrate or District Superintendent of Police or Commissioner of Police within the local limits of whose jurisdiction it is to be executed and the Executive Magistrate or District Superintendent or Commissioner shall endorse his name thereon and if practicable, cause it to be executed in the manner hereinbefore provided


(2) The Court issuing a warrant under sub-section (1) shall forward, along with the warrant, the substance of the information against the person to be arrested together with such documents, if any, as may be sufficient to enable the Court acting under section 81 to decide whether bail should or should not be granted to the person.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 78 of Criminal Procedure Code 1973:

State Through Cbi vs Dawood Ibrahim Kaskar & Ors on 7 May, 1997



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 78 का विवरण :  -  78. अधिकारिता के बाहर निष्पादन के लिए भेजा गया वारण्ट -- (1) जब वारण्ट का निष्पादन उसे जारी करने वाले न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता के बाहर किया जाना है, तब वह न्यायालय ऐसा वारण्ट अपनी अधिकारिता के अंदर किसी पुलिस अधिकारी को निदिष्ट करने के बजाय उसे डाक द्वारा या अन्यथा किसी ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट या जिला पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त को भेज सकता है जिसकी अधिकारिता का स्थानीय सीमाओं के अन्दर उसका निष्पादन किया जाना है, और वह कार्यपालक मजिस्ट्रेट या जिला अधीक्षक या आयुक्त उस पर अपना नाम पृष्ठांकित करेगा और यदि साध्य है तो उसका निष्पादन इसमें इसके पूर्व उपबंधित रीति से कराएगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन वारण्ट जारी करने वाला न्यायालय गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी जानकारी का सार ऐसी दस्तावेजों सहित, यदि कोई हो, जो धारा 81 के अधीन कार्रवाई करने वाले न्यायालय को, यह विनिश्चित करने में कि उस व्यक्ति की जमानत मंजूर की जाए या नहीं समर्थ बनाने के लिए पर्याप्त है, वारण्ट के साथ भेजेगा।


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