Section 91 Indian Evidence Act 1872


Section 91 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English 



Section 91 Evidence Act 1872 : Evidence of terms of contracts, grants and other dispositions of property reduced to form of document -- When the terms of a contract, or of a grant, or of any other disposition of property, have been reduced to the form of a document, and in all cases in which any matter is required by law to be reduced to the form of a document, no evidence shall be given in proof of the terms of such contract, grant or other disposition of property, or of such matter, except the document itself, or secondary evidence of its contents in cases in which secondary evidence is admissible under the provisions hereinbefore contained.

Exception 1 - When a public officer is required by law to be appointed in writing, and when it is shown that any particular person has acted as such officer, the writing by which he is appointed need not be proved.

Exception 2 -- Wills admitted to probate in India may be proved by the probate.

Explanation 1 -- This section applies equally to cases in which the contracts, grants or dispositions of property referred to are contained in one document, and to cases in which they are contained in more documents than one.

Explanation 2 -- Where there are more originals than one, one original only need be proved.

Explanation 3 -- The statement, in any document whatever, of a fact other than the facts referred to in this section, shall not preclude the admission of oral evidence as to the same fact.


Illustrations

(a) If a contract be contained in several letters, all the letters in which it is contained must be proved.

(b) If a contract is contained in a bill of exchange, the bill of exchange must be proved.

(c) If a bill of exchange is drawn in a set of three, one only need be proved.

(d) A contracts, in writing, with B, for the delivery of indigo upon certain terms.

The contract mentions the fact that B had paid A the price of other indigo contracted for verbally on another occasion.

Oral evidence is offered that no payment was made for the other indigo. The evidence is admissible.

(e) A gives B receipt for money paid by B.

Oral evidence is offered of the payment.

The evidence is admissible.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 91 Indian Evidence Act 1872:

Bai Hira Devi And Others vs The Official Assignee Of Bombay on 20 February, 1958

Roop Kumar vs Mohan Thedani on 2 April, 2003

Asokan vs Lakshmikutty & Ors on 14 December, 2007

M/S. V.L.S. Finance Ltd vs S.P. Gupta And Anr on 5 February, 2016

R. Janakiraman vs State Of Tamil Nadu, Through Cbi, on 4 January, 2006

Vimal Chand Ghevarchand Jain & Ors vs Ramakant Eknath Jajoo on 23 March, 2009

R. Janakiraman vs State Represented By Inspector Of  on 4 January, 2006

Shyam Narayan Prasad vs Krishna Prasad on 2 July, 2018

Hindustan Lever Ltd., Bombay vs The Monopolies & Restrictive on 17 April, 1977

Veeramachineni Gangadhara Rao vs Andhra Bank Ltd. Ors on 25 March, 1971



भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 91 का विवरण :  -  दस्तावेजों के रूप में लेखबद्ध संविदाओं, अनुदानों तथा संपत्ति के अन्य व्ययनों के अनिबंधनों का साक्ष्य -- जबकि किसी संविदा के या अनुदान के या संपत्ति के किसी अन्य व्ययन के निबंधन दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध कर लिए गए हों तब, तथा उन सब दशाओं में, जिनमें विधि द्वारा अपेक्षित है कि कोई बात दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध की जाए, ऐसी संविदा, अनुदान या संपत्ति के अन्य व्ययन के निबंधनों के या ऐसी बात के साबित किए जाने के लिए स्वयं उस दस्तावेज के सिवाय, या उन दशाओं में जिनमें एतस्मिनपूर्व अन्तर्विष्ट उपबंधों के अधीन द्वितीयक साक्ष्य ग्राह्य है, उसकी अंतर्वस्तु के द्वितीयक साक्ष्य के सिवाय, कोई भी साक्ष्य नहीं दिया जाएगा।

अपवाद 1 -- जबकि विधि द्वारा यह अपेक्षित है कि किसी लोक ऑफिसर की नियुक्ति लिखित रूप में हो और जब यह दर्शित किया गया है कि किसी विशिष्ट व्यक्ति ने ऐसे ऑफिसर के नाते कार्य किया है तब उस लेख का, जिसके द्वारा वह नियुक्त किया गया था, साबित किया जाना आवश्यक नहीं है।

अपवाद 2 -- जिन विलों का भारत में प्रोबेट मिला है, वे प्रोबेट द्वारा साबित की जा सकेंगी।

स्पष्टीकरण 1 -- यह धारा उन दशाओं को जिनमें निर्दिष्ट संविदाएं, अनुदान या संपत्ति के व्ययन एक ही दस्तावेज में अंतर्विष्ट हैं तथा उन दशाओं को, जिनमें वे एक से अधिक दस्तावेजों में अन्तर्विष्ट हैं, समान रूप से लागू है।

स्पष्टीकरण 2 -- जहां कि एक से अधिक मूल हैं, वहां केवल एक मूल साबित करना आवश्यक है।

स्पष्टीकरण 3 -- इस धारा में निर्दिष्ट तथ्यों से भिन्न किसी तथ्य का किसी भी दस्तावेज में कथन, उसी तथ्य के बारे में मौखिक साक्ष्य की ग्राह्यता का प्रवारण नहीं करेगा।


दृष्टांत

(क) यदि कोई संविदा कई पत्रों में अन्तर्विष्ट है, तो वे सभी पत्र, जिनमें वह अन्तर्विष्ट है, साबित करने होंगे।

(ख) यदि कोई संविदा किसी विनिमय -पत्र में अन्तर्विष्ट है, तो वह विनिमय-पत्र साबित करना होगा।

(ग) यदि विनिमय-पत्र तीन परतों में लिखित है, तो केवल एक को साबित करना आवश्यक है।

(घ) ख से कतिपय निबंधनों पर क नील के परिदान के लिए लिखित संविदा करता है। संविदा इस तथ्य का वर्णन करती है कि ख ने क को किसी अन्य अवसर पर मौखिक रूप से संविदाकृत अन्य नील का मूल्य चुकाया था।

मौखिक साक्ष्य पेश किया जाता है कि अन्य नील के लिए कोई संदाय नहीं किया गया। यह साक्ष्य ग्राह्य है।

(ङ) ख द्वारा दिए गए धन की रसीद ख को क देता है।

संदाय करने का मौखिक साक्ष्य पेश किया जाता है।

यह साक्ष्य ग्राह्य है।


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