Section 63 Indian Evidence Act 1872

 

Section 63 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English 



Section 63 Evidence Act 1872 :Secondary evidence -- Secondary evidence means and includes--

(1) certified copies given under the provisions hereinafter contained;

(2) copies made from the original by mechanical processes which in themselves ensure the accuracy of the copy, and copies compared with such copies;

(3) copies made from or compared with the original;

(4) counterparts of documents as against the parties who did not execute them;

(5) oral accounts of the contents of a document given by some person who has himself seen it.

Illustrations

(a) A photograph of an original is secondary evidence of its contents, though the two have not been compared, if it is proved that the thing photographed was the original.

(b) A copy compared with a copy of a letter made by a copying machine is secondary evidence of the contents of the letter, if it is shown that the copy made by the copying machine was made from the original.

(c) A copy transcribed from a copy, but afterward compared with the original, is secondary evidence; but the copy not so compared is not secondary evidence of the original, although the copy from which it was transcribed was compared with the original.

(d) Neither an oral account of a copy compared with the original, nor an oral account of a photograph or machine-copy of the original, is secondary evidence of the original.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 63 Indian Evidence Act 1872:

Jagdish Chand Sharma vs Narain Singh Saini (Dead) Thr. on 1 May, 2015

Arjun Panditrao Khotkar vs Kailash Kushanrao Gorantyal on 14 July, 2020

Raj Kumari vs Surinder Pal Sharma on 17 December, 2019

Anvar P.V vs P.K.Basheer & Ors on 18 September, 2014

Smt. J. Yashoda vs Smt. K. Shobha Rani on 19 April, 2007

M.B. Ramesh (D) By Lrs vs K.M. Veeraje Urs (D) By Lrs. & Ors on 3 May, 2013

State (N.C.T. Of Delhi) vs Navjot Sandhu@ Afsan Guru on 4 August, 2005

Sonu @ Amar vs State Of Haryana on 18 July, 2017

Kalyan Singh, London Trained, vs Smt. Chhoti And Ors on 1 December, 1989

Rattan Singh vs Nirmal Gill on 16 November, 2020



भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 63 का विवरण :  -  द्वितीयक साक्ष्य -- द्वितीयक साक्ष्य से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत आते हैं--

(1) एतस्मिन् पश्चात् अन्तर्विष्ट उपबंधों के अधीन दी हुई प्रमाणित प्रतियाँ;

(2) मूल से ऐसी यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा, जो प्रक्रियाएं स्वयं ही प्रति की शुद्धता सुनिश्चित करती हैं, बनाई गई प्रतियाँ तथा ऐसी प्रतियों से तुलना की हुई प्रतिलिपियाँ;

(3) मूल से बनाई गई या तुलना की गई प्रतियाँ;

(4) उन पक्षकारों के विरुद्ध, जिन्होने उन्हें निष्पादित नहीं किया है, दस्तावेजों के प्रतिलेख;

(5) किसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तु का उस व्यक्ति द्वारा, जिसने स्वयं उसे देखा है, दिया हुआ मौखिक वृत्तांत।


दृष्टांत

(क) किसी मूल का फोटोचित्र, यद्यपि दोनों की तुलना न की गई हो, तथापि यदि यह साबित किया जाता है कि फोटो चित्रित वस्तु मूल थी, उस मूल की अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य है।

(ख) किसी पत्र की वह प्रति, जिसकी तुलना उस पत्र की, उस प्रति से कर ली गई है जो प्रतिलिपि यंत्र द्वारा तैयार की गई है, उस पत्र की अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य है, यदि यह दर्शित कर दिया जाता है कि प्रतिलिपि यंत्र द्वारा तैयार की गई प्रति मूल से बनाई गई थी।

(ग) प्रति की नकल करके तैयार की गई, किन्तु तत्पश्चात् मूल से तुलना की हुई प्रतिलिपि द्वितीयक साक्ष्य है, किन्तु इस प्रकार तुलना नहीं की हुई प्रति मूल का द्वितीयक साक्ष्य नहीं है, यद्यपि उस प्रति की, जिससे वह नकल की गई है, मूल से तुलना की गई थी।

(घ) न तो मूल से तुलनाकृत प्रति का मौखिक वृत्तांत और न मूल के किसी फोटोचित्र या यंत्रकृत प्रति का मौखिक वत्तांत मूल का द्वितीयक साक्ष्य है।


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