Section 41 Indian Evidence Act 1872

 Section 41 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English



Section 41 Evidence Act 1872 :Relevancy of certain judgments in probate, etc., jurisdiction -- A final judgment, order or decree of a competent Court, in the exercise of probate, matrimonial, admiralty or insolvency jurisdiction, which confers upon or takes away from any person any legal character, or which declares any person to be entitled to any such character, or to be entitled to any specific thing, not as against any specified person but absolutely, is relevant when the existence of any such legal character, or the title of any such person to any such thing is relevant.

Such judgment, order or decree is conclusive proof--

that any legal character which it confers accrued at the time when such judgment, order or decree came into operation;

that any legal character, to which it declares any such person to be entitled, accrued, to that person at the time when such judgment, order or decree declares it to have accrued to that person;

that any legal character which it takes away from any such person ceased at the time from which such judgement, order or decree declared that it had ceased or should cease;

and that anything to which it declares any person to be so entitled was the property of that person at the time from which such judgment, order, or decree declares that it had been or should be his property.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 41 Indian Evidence Act 1872:

R. Viswanathan vs Rukn-Ul-Mulk Syed Abdul Wajid on 4 May, 1962

Hindu Religious Endowments & Ors vs B. Samitra & Ors on 20 February, 1976

Syed Askari Hadi Ali Augustine vs State (Delhi Admn.) & Anr on 3 March, 2009

Raj Kumar Karwal vs Union Of India And Ors.Withkirpal on 21 March, 1990

Syed Askari Hadi Ali Augustine vs State (Delhi Admn.) & Anr on 3 March, 2009

Guru Granth Saheb Sthan Meerghat vs Ved Prakash & Ors on 1 May, 2013

State Of Bihar vs Radha Krishna Singh & Ors on 20 April, 1983

K.G. Premshanker vs Inspector Of Police And Anr on 12 September, 2002

Satya vs Teja Singh on 1 October, 1974

Vishnu Dutt Sharma vs Daya Sapra on 5 May, 2009



भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 41 का विवरण :  -  प्रोबेट इत्यादि विषयक अधिकारिता के किन्हीं निर्णयों की सुसंगति -- किसी सक्षम न्यायालय के प्रोबेट विषयक, विवाह विषयक, नावधिकरण विषयक या दिवाला विषयक अधिकारिता के प्रयोग में दिया हुआ अंतिम निर्णय, आदेश या डिक्री, जो किसी व्यक्ति को, या से कोई विधिक हैसियत प्रदान करती या ले लेती है या जो सर्वतः न कि किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति के विरुद्ध किसी व्यक्ति को ऐसी किसी हैसियत का हकदार या किसी विनिर्दिष्ट चीज का हकदार घोषित करती है, तब सुसंगत है जबकि ऐसी विधिक हैसियत, या किसी ऐसी चीज पर किसी ऐसे व्यक्ति के हक का अस्तित्व सुसंगत है;

ऐसा निर्णय, आदेश या डिक्री इस बात का निश्चायक सबूत है--

कि कोई विधिक हैसियत, जो वह प्रदत्त करती है, उस समय प्रोद्भूत हुई, जब ऐसा निर्णय, आदेश या डिक्री प्रवर्तन में आई;

कि कोई विधिक हैसियत, जिसके लिए वह किसी व्यक्ति को हकदार घोषित करती है, उस व्यक्ति को उस समय प्रोद्भूत हुई जो समय ऐसे निर्णय आदेश या डिक्री द्वारा घोषित है कि उस समय वह उस व्यक्ति को प्रोद्भूत हुई;

कि कोई विधिक हैसियत, जिसे वह किसी ऐसे व्यक्ति से ले लेती है, उस समय खत्म हुई, जो उस समय ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री द्वारा घोषित है कि उस समय से वह हैसियत खत्म हो गई थी या खत्म हो जानी चाहिए;

और कि कोई चीज, जिसके लिए वह किसी व्यक्ति को ऐसा हकदार घोषित करती है, उस व्यक्ति की उस समय संपत्ति थी, जो समय ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री द्वारा घोषित है कि उस समय से वह चीज उसकी संपत्ति थी या होनी चाहिए।


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