Section 121 Indian Evidence Act 1872

 


Section 121 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English 



Section 121 Evidence Act 1872 :Judges and Magistrates -- No Judge or Magistrate shall, except upon the special order to some Court to which he is subordinate, be compelled to answer any questions as to his own conduct in Court as such Judge or Magistrate, or as to anything which came to his knowledge in Court as such Judge or Magistrate; but he may be examined as to other matters which occurred in his presence whilst he was so acting.

Illustrations

(a) A, on his trial before the Court of Session, says that a deposition was improperly taken by B, the Magistrate. B cannot be compelled to answer questions as to this, except upon the special order of a superior Court.

(b) A is accused before the Court of Session of having given false evidence before B, a Magistrate. B cannot be asked what A said, except upon the special order of the Superior Court.

(c) A is accused before the Court of Session of attempting to murder a police officer whilst on his trial before B a Session Judge. B may be examined as to what occurred.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 121 Indian Evidence Act 1872:

Md.Ajmal Md.Amir Kasab @Abu vs State Of Maharashtra on 29 August, 2012

Mohd.Arif @ Ashfaq vs State Of Nct Of Delhi on 10 August, 2011

Union Of India vs Orient Engg. & Commercial Co. Ltd.  on 7 October, 1977

State (N.C.T. Of Delhi) vs Navjot Sandhu@ Afsan Guru on 4 August, 2005

R.Dineshkumar@Deena vs State Rep. By Inspector Of Police on 16 March, 2015

Arjun Panditrao Khotkar vs Kailash Kushanrao Gorantyal on 14 July, 2020

V. Kalyanaswamy (D) By Lrs. vs L. Bakthavatsalam (D) Thr. Lrs. on 17 July, 2020



भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 121 का विवरण :  -  न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट -- कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट न्यायालय में ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के नाते अपने स्वयं के आचरण के बारे में, या ऐसी किसी बात के बारे में, जिसका ज्ञान उसे ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के नाते न्यायालय में हुआ, किन्हीं प्रश्नों का उत्तर देने के लिए ऐसे किसी भी न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय, जिसके वह अधीनस्थ है, विवश नहीं किया जाएगा, किन्तु अन्य बातों के बारे में जो उसकी उपस्थिति में उस समय घटित हुई थी, जब वह ऐसे कार्य कर रहा था, उसकी परीक्षा की जा सकेगी।

दृष्टांत

(क) सेशन न्यायालय के समक्ष अपने विचारण में क कहता है कि अभिसाक्ष्य मजिस्ट्रेट ख द्वारा अनुचित रूप से लिया गया था। तद्विषयक प्रश्नों का उत्तर देने के लिए ख को किसी वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय विवश नहीं किया जा सकता।

(ख) मजिस्ट्रेट ख के समक्ष मिथ्या साक्ष्य देने का क सेशन न्यायालय के समक्ष अभियुक्त है। वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय ख से यह नहीं पूछा जा सकता है कि क ने क्या कहा था।

(ग) क सेशन न्यायालय के समक्ष इसलिए अभियुक्त है कि उसने सेशन न्यायाधीश ख के समक्ष विचारित होते समय किसी पुलिस ऑफिसर की हत्या करने का प्रयत्न किया। ख की यह परीक्षा की जा सकेगी कि क्या घटित हुआ था।


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