Section 66 Indian Evidence Act 1872

 

Section 66 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English 



Section 66 Evidence Act 1872 :Rules as to notice to produce -- Secondary evidence of the contents of the documents referred to in section 65, clause (a), shall not be given unless the party proposing to give such secondary evidence has previously given to the party in whose possession or power the document is, or to his attorney or pleader, such notice to produce it as is prescribed by law; and if no notice is prescribed by law, then such notice as the Court considers reasonable under the circumstances of the case :

Provided that such notice shall not be required in order to render secondary evidence admissible in any of the following cases, or in any other case in which the Court thinks fit to dispense with it :-

(1) when the document to be proved is itself a notice;

(2) when, from the nature of the case, the adverse party must know that he will be required to produce it;

(3) when it appears or is proved that the adverse party has obtained possession of the original by fraud or force;

(4) when the adverse party or his agent has the original in Court;

(5) when the adverse party or his agent has admitted the loss of the document;

(6) when the person in possession of the document is out of reach of, or not subject to, the process of the Court.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 66 Indian Evidence Act 1872:

Behram Khurshed Pesikaka vs The State Of Bombay.Reference on 19 February, 1954

Behram Khurshed Pesikaka vs The State Of Bombay on 24 September, 1954

Jagmail Singh vs Karamjit Singh on 13 May, 2020

Smt. J. Yashoda vs Smt. K. Shobha Rani on 19 April, 2007

Zarina Siddiqui vs A.Ramalingam @ R.Amarnathan on 29 October, 2014

Narbada Devi Gupta vs Birendra Kumar Jaiswal And Anr on 3 November, 2003

H. Siddiqui (D) By Lr vs A. Ramalingam on 4 March, 2011

U.Sree vs U.Srinivas on 11 December, 2012

Ram Krishna Bedu Rane vs State Of Maharashtra on 1 November, 1972

K. Nanjappa (D) By Lrs vs R.A. Hameed @ Ameersab (D)By Lrs. &  on 2 September, 2015



भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 66 का विवरण :  -  पेश करने की सूचना के बारे में नियम -- धारा 65, खण्ड (क) में निर्दिष्ट दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य तब तक न दिया जा सकेगा, जब तक ऐसे द्वितीयक साक्ष्य देने की प्रस्थापना करने वाले . पक्षकार ने उस पक्षकार को जिसके कब्जे में या शक्त्यधीन वह दस्तावेज है या उसके अटर्नी या प्लीडर को उसे पेश करने के लिए ऐसी सूचना, जैसी कि विधि द्वारा विहित है, और यदि विधि द्वारा कोई सूचना विहित नहीं हो तो ऐसी सूचना जैसी न्यायालय मामले की परिस्थितियों के अधीन यक्तियुक्त समझता है न दे दी हो :

परन्तु ऐसी सूचना निम्नलिखित अवस्थाओं में से किसी में अथवा किसी भी अन्य अवस्था में, जिसमें न्यायालय उसके दिए जाने से अभिमुक्ति प्रदान कर दे, द्वितीयक साक्ष्य को ग्राह्य बनाने के लिए अपेक्षित नहीं की जाएगी :-

(1) जबकि साबित की जाने वाली दस्तावेज स्वयं एक सूचना है;

(2) जबकि प्रतिपक्षी को मामले की प्रकृति से यह जानना ही होगा कि उसे पेश करने की उससे अपेक्षा की जाएगी;

(3) जबकि यह प्रतीत होता है या साबित किया जाता है कि प्रतिपक्षी ने मूल पर कब्जा कपट या बल द्वारा अभिप्राप्त कर लिया है;

(4) जबकि मूल प्रतिपक्षी या उसके अभिकर्ता के पास न्यायालय में है;

(5) जबकि प्रतिपक्षी या उसके अभिकर्ता ने उसका खो जाना स्वीकार कर लिया है;

(6) जबकि दस्तावेज पर कब्जा रखने वाला व्यक्ति न्यायालय की आदेशिका की पहँच के बाहर है या ऐसी आदेशिका के अध्यधीन नहीं है।


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