Section 102 Indian Evidence Act 1872

 

Section 102 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English



Section 102 Evidence Act 1872 :On whom burden of proof lies -- The burden of proof in a suit or proceeding lies on that person who would fail if no evidence at all were given on either side.

Illustrations

(a) A sues B for land of which B is in possession, and which, as A asserts, was left to A by the Will of C, B's father.

If no evidence were given on either side, B would be entitled to retain his possession.

Therefore, the burden of proof is on A.

(b) A sues B for money due: on a bond.

The execution of the bond is admitted, but B says that it was obtained by fraud, which A denies.

If no evidence were given on either side, A would succeed, as the bond is not disputed and the fraud is not proved.

Therefore, the burden of proof is on B.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 102 Indian Evidence Act 1872:

Narayan Govind Gavate Etc vs State Of Maharashtra on 11 October, 1976

Vijayee Singh And Ors vs State Of Uttar Pradesh on 20 April, 1990

Radhy Shyam(D)Thr. Lrs & Ors vs State Of U.P.& Ors on 15 April, 2011

Sebastiao Luis vs K.V.P.Shastri & Ors on 10 December, 2013

State Of West Bengal & Ors vs Prafulla Churan Law & Ors on 4 February, 2011

Sebastiao Luis vs K.V.P.Shastri & Ors on 10 December, 2013

Varada Bhavanarayana Rao vs State Of Andhra Pradesh & Ors on 25 March, 1963

Om Prakash & Anr vs State Of U.P. & Ors on 15 July, 1998

S.P. Gupta vs Union Of India & Anr on 30 December, 1981

Anil Rishi vs Gurbaksh Singh on 2 May, 2006



भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 102 का विवरण :  -  सबूत का भार किस पर होता है -- किसी वाद या कार्यवाही में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो असफल हो जाएगा, यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई भी साक्ष्य न दिया जाए।

दृष्टांत

(क) ख पर उस भूमि के लिए क वाद लाता है जो ख के कब्जे में है और जिसके बारे में क प्राख्यान करता है कि वह ख के पिता ग की विल द्वारा क के लिए दी गई थी।

यदि किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं दिया जाए, तो ख इसका हकदार होगा कि वह अपना कब्जा रखे रहे।

अतः सबूत का भार क पर है।

(ख) ख पर एक बंधपत्र मद्धे शोध्य धन के लिए क वाद लाता है।

उस बंधपत्र का निष्पादन स्वीकृत है, किन्तु ख कहता है कि वह कपट द्वारा अभिप्राप्त किया गया था, जिस बात का क प्रत्याख्यान करता है।

यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं दिया जाए, तो क सफल होगा, क्योंकि बंधपत्र विवादग्रस्त नहीं है और कपट साबित नहीं किया गया।

अतः सबूत का भार ख पर है।


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