Section 60 Indian Evidence Act 1872


Section 60 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English 



Section 60 Evidence Act 1872 :Oral evidence must be direct -- Oral evidence must, in all cases whatever, be direct; that is to say--

if it refers to a fact which could be seen, it must be the evidence of a witness who says he saw it;

if it refers to a fact which could be heard, it must be the evidence of a witness who says he heard it;

if it refers to a fact which could be perceived by any other sense or in any other manner, it must be the evidence of a witness who says he perceived it by that sense or in that manner;

if it refers to an opinion or to the grounds on which that opinion is held, it must be the evidence of the person who holds that opinion on those grounds :

Provided that the opinions of experts expressed in any treatise commonly offered for sale, and the grounds on which such opinions are held, may be proved by the production of such treatises if the author is dead or cannot be found, or has become incapable of giving evidence, or cannot be called as a witness without an amount of delay or expense which the Court regards as unreasonable :

Provided also that, if oral evidence, refers to the existence or condition of any material thing other than a document, the Court may, if it thinks fit, require the production of such material thing for its inspection.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 60 Indian Evidence Act 1872:

State Of Maharashtra vs Kamal Ahmed Mohd. Vakil Ansari & on 14 March, 2013

Dolgobinda Paricha vs Nimai Charan Misra & Others on 27 April, 1959

Bant Singh & Anr vs Niranjan Singh (D) By Lrs. & Anr on 15 January, 2008

Bant Singh And Anr. vs Niranjan Singh (D) By Lrs. And Anr. on 15 February, 2008

Shyam Lal @ Kuldeep vs Sanjeev Kumar & Ors on 15 April, 2009

Amar Singh vs State Of Rajasthan on 3 August, 2010

Sri Chand Batra vs State Of U.P on 19 December, 1973

Brindaban Das & Ors vs State Of West Bengal on 7 January, 2009

Vijender vs State Of Delhi on 12 February, 1997

Achutananda Baidya vs Prafullya Kumar Gayen And Ors on 8 April, 1997



भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 60 का विवरण :  -  मौखिक साक्ष्य प्रत्यक्ष होना चाहिए -- मौखिक साक्ष्य, समस्त अवस्थाओं में चाहे वे कैसी ही हों, प्रत्यक्ष ही होगा, अर्थात्--

यदि वह किसी देखे जा सकने वाले तथ्य के बारे में है, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा, जो कहता है कि उसने उसे देखा;

यदि वह किसी सुने जा सकने वाले तथ्य के बारे में है, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसे सुना;

यदि वह किसी ऐसे तथ्य के बारे में है जिसका किसी अन्य इंद्रिय द्वारा या किसी अन्य रीति से बोध हो सकता था, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसका बोध इस इंद्रिय द्वारा या उस रीति से किया;

यदि वह किसी राय के, या उन आधारों के, जिन पर राय धारित है, बारे में है, तो वह उस व्यक्ति का ही साक्ष्य होगा जो वह राय उन आधारों पर धारण करता है :

परन्तु विशेषज्ञों की राय, जो सामान्यतः विक्रय के लिए प्रस्थापित की जाने वाली किसी पुस्तक में अभिव्यक्त है, और वे आधार, जिन पर ऐसी राय धारित है, यदि रचयिता मर गया है, या वह मिल नहीं सकता है या वह साक्ष्य देने के लिए असमर्थ हो गया है या उसे इतने विलम्ब या व्यय के बिना जितना न्यायालय अयुक्तियुक्त समझता है, साक्षी के रूप में बुलाया नहीं जा सकता हो, ऐसी पुस्तकों को पेश करके साबित किए जा सकेंगे:

परन्तु यह भी कि यदि मौखिक साक्ष्य दस्तावेज से भिन्न किसी भौतिक चीज के अस्तित्व या दशा के बारे में है, तो न्यायालय यदि वह ठीक समझे, ऐसी भौतिक चीज का अपने निरीक्षणार्थ पेश किया जाना अपेक्षित कर सकेगा।


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