Section 385 CrPC

 

Section 385 CrPC in Hindi and English



Section 385 of CrPC 1973 :- 385. Procedure for hearing appeals not dismissed summarily -

(1) If the Appellate Court does not dismiss the appeal summarily, it shall cause notice of the time and place at which such appeal will be heard to be given

(i) to the appellant or his pleader;

(ii) to such officer as the State Government may appoint in this behalf;

(iii) if the appeal is from a judgment of conviction in a case instituted upon complaint, to the complainant;

(iv) if the appeal is under section 377 or section 378, to the accused, and shall also furnish such officer, complainant and accused with a copy of the grounds of appeal.

(2) The Appellate Court shall then send for the record or the case, if such record is not already available in that Court and hear the parties :

Provided that if the appeal is only as to the extent or the legality of the sentence, the Court may dispose of the appeal without sending for the record.

(3) Where the only ground for appeal from a conviction is the alleged severity of the sentence, the appellant shall not, except with the leave of the Court urge or be heard in support of any other ground.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 385 of Criminal Procedure Code 1973:

Hanumant Dass vs Vinay Kumar & Ors on 5 April, 1982

Bani Singh And Ohters vs State Of U.P. on 9 July, 1996

State Of M.P vs Gauri Shankar on 4 October, 2005

State Of M.P vs Bala @ Balaram on 3 October, 2005

Surya Baksh Singh vs State Of U.P on 7 October, 2013

State Of M.P vs Badri @ Bhuru on 24 October, 2005

State Of M.P vs Sangram & Ors on 20 October, 2005

State Of M.P vs Ram Kumar on 24 October, 2005

State Of M.P vs Govind on 4 October, 2005

State Of M.P vs Makhmal Khan And Others on 5 October, 2005




दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 1 का विवरण :  -  385. संक्षेपतः खारिज न की गई अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया --

(1) यदि अपील न्यायालय अपील को संक्षेपतः खारिज नहीं करता है तो वह उस समय और स्थान की, जब और जहाँ ऐसी अपील सुनी जाएगी, सूचना--

(i) अपीलार्थी या उसके प्लीडर को;

(ii) ऐसे अधिकारी को, जिसे राज्य सरकार इस निमित्त नियुक्त करे:

(iii) यदि परिवाद पर संस्थित मामले में दोषसिद्धि के निर्णय के विरुद्ध अपील की गई है, तो परिवादी को;

(iv) यदि अपील धारा 377 या धारा 378 के अधीन की गई है तो अभियुक्त को, दिलवाएगा, और ऐसे अधिकारी, परिवादी और अभियुक्त को अपील के आधारों की प्रतिलिपि भी देगा।

(2) यदि अपील न्यायालय में मामले का अभिलेख, पहले से ही उपलब्ध नहीं है तो वह न्यायालय ऐसा अभिलेख मंगाएगा और पक्षकारों को सुनेगा:  

परन्तु यदि अपील केवल दण्ड के परिमाण या उसकी वैधता के बारे में है तो न्यायालय अभिलेख मंगाए बिना ही अपील का निपटारा कर सकता है।

(3) जहाँ दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील का आधार केवल दण्डादेश की अभिकथित कठोरता है, वहाँ अपीलार्थी न्यायालय की इजाजत के बिना अन्य किसी आधार के समर्थन में न तो कहेगा और न उसे उसके समर्थन में सुना ही जाएगा।



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