Section 339 CrPC

 

Section 339 CrPC in Hindi and English



Section 339 of CrPC 1973 :- 339. Delivery of lunatic to care of relative or friend —

(1) Whenever any relative or friend of any person detained under the provisions of section 330 or section 335 desires that he shall be delivered to his care and custody, the State Government may, upon the application of such relative or friend and on his giving security to the satisfaction of such State Government, that the person delivered shall —

(a) be properly taken care of and prevented from doing injury to himself or to any other person;

(b) be produced for the inspection of such officer, and at such times and places, as the State Government may direct;

(c) in the case of a person detained under sub-section (2) of section 330, be produced when required before such Magistrate or Court, order such person to be delivered to such relative or friend.

(2) If the person so delivered is accused of any offence, the trial of which has been postponed by reason of his being of unsound mind and incapable of making his defence, and the inspecting officer referred to in clause (b) of sub-section (1), certifies at any time to the Magistrate or Court that such person is capable of making his defence, such Magistrate or Court shall call upon the relative or friend to whom such accused was delivered to produce him before the Magistrate or Court; and, upon such production the magistrate or Court shall proceed in accordance with the provisions of section 332, and the certificate of the inspecting officer shall be receivable as evidence.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 339 of Criminal Procedure Code 1973:

Harshad S. Mehta & Ors vs The State Of Maharashtra on 6 September, 2001

Bipin Behari Sarkar And Another vs The State Of West Bengal on 19 September, 1958

The State vs Hiralal G. Kothari And Others on 30 November, 1959

State Of Tamil Nadu vs V. Krishnnaswami Naidu & Anr on 3 May, 1979

State Of Maharashtra vs Abu Salem Abdul Kayyum Ansari & Ors on 5 October, 2010

Kishore Samrite vs State Of U.P. & Ors on 18 October, 2012

The State vs Hiralal Girdharilal Kothari, on 30 November, 1959

Karamjeet Singh vs Union Of India on 8 October, 1992

A.R. Antulay vs R.S. Nayak & Anr on 29 April, 1988

Ashok Kumar Pandey vs The State Of West Bengal on 18 November, 2003



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 339 का विवरण :  -  339. नातेदार या मित्र की देख-रेख के लिए पागल का सौंपा जाना --

(1) जब कभी धारा 330 या धारा 335 के उपबंधों के अधीन निरुद्ध किसी व्यक्ति का कोई नातेदार या मित्र यह चाहता है कि वह व्यक्ति उसकी देख-रेख और अभिरक्षा में रखे जाने के लिए सौंप दिया जाए जब राज्य सरकार उस नातेदार या मित्र के आवेदन पर और उसके द्वारा ऐसी राज्य सरकार को समाधानप्रद प्रतिभूति इस बाबत दिए जाने पर कि--

(क) सौपे गए व्यक्ति की समुचित देख-रेख की जाएगी और वह अपने आपको या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुँचाने से निवारित रखा जाएगा; 

(ख) सौंपा गया व्यक्ति ऐसे अधिकारी के समक्ष और ऐसे समय और स्थानों पर, जो राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए जाएँ, निरीक्षण के लिए पेश किया जाएगा;

(ग) सौंपा गया व्यक्ति, उस दशा में जिसमें वह धारा 330 की उपधारा (2) के अधीन निरुद्ध व्यक्ति है, अपेक्षा किए जाने पर ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा, ऐसे व्यक्ति को ऐसे नातेदार या मित्र को सौंपने का आदेश दे सकेगी।

(2) यदि ऐसे सौंपा गया व्यक्ति किसी ऐसे अपराध के लिए अभियुक्त है, जिसका विचारण उसके विकृतचित्त होने और अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ होने के कारण मुल्तवी किया गया है और उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट निरीक्षण अधिकारी किसी समय मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष यह प्रमाणित करता है कि ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है तो ऐसा मजिस्ट्रेट या न्यायालय उस नातेदार या मित्र से, जिसे ऐसा अभियुक्त सौंपा गया है, अपेक्षा करेगा कि वह उसे उस मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष पेश करे और ऐसे पेश किए जाने पर वह मजिस्ट्रेट या न्यायालय धारा 332 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करेगा और निरीक्षण अधिकारी का प्रमाण पत्र साक्ष्य के तौर पर ग्रहण किया जा सकता है।



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