Section 326 CrPC

 Section 326 CrPC in Hindi and English


Section 326 of CrPC 1973 :- 326. Conviction or commitment on evidence partly recorded by one Judge or Magistrate and partly by another –


(1) Whenever any [Judge or Magistrate], after having heard and recorded the whole or any part of the evidence in an inquiry or a trial, ceases to exercise jurisdiction therein and is succeeded by another [Judge or Magistrate] who has and who exercises such jurisdiction, the [Judge or Magistrate] so succeeding may act on the evidence so recorded by his predecessor, or partly recorded by his predecessor and partly recorded by himself:


Provided that if the succeeding [Judge or Magistrate] is of opinion that further examination of any of the witnesses whose evidence has already been recorded is necessary in the interests of justice, he may re-summon any such witness, and after such further examination, cross-examination and re-examination, if any, as he may permit, the witness shall be discharged.

(2) When a case is transferred under the provisions of this Code '[from one Judge to another Judge or from one Magistrate to another Magistrate,] the former shall be deemed to cease to exercise jurisdiction therein, and to be succeeded by the latter, within the meaning of sub-section (1).

(3) Nothing in this section applies to summary trials or to cases in which proceedings have been stayed under section 322 or in which proceedings have been submitted to a superior Magistrate under section 325.


STATE AMENDMENTS

Rajasthan — In section 326 (a). in sub-section (1), for the word “Magistrate”, wherever it occurs, the words "Judge or

Magistrate” shall be substituted; (b) in sub-section (2), before the words “from one Magistrate to another Magistrate”, the words “from one Judge to another Judge or” shall be inserted.

[Vide Rajasthan Act 10 of 1977, sec. 3 (w.e.f. 3-9-1977)]

Uttar Pradesh - In section 326 (a) in sub-section (1), for the word “Magistrate," wherever occurring the words “Judge or

Magistrate” shall be substituted; (b) in sub-section (2), before the words “from one Magistrate to another Magistrate”, the words “from one Judge to another Judge or” shall be inserted.

[Vide Uttar Pradesh Act 16 of 1976, sec: 8 (w.e.f. 1-5-1976)




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 326 of Criminal Procedure Code 1973:

Nitinbhai Saevantilal Shah & Anr vs Manubhai Manjibhai Panchal & Anr on 1 September, 2011

State Of Jammu & Kashmir vs Hazara Singh And Anr. on 24 September, 1980

Pandurang Chandrakant Mhatre & vs State Of Maharashtra on 8 October, 2009

Surajpal Singh And Others vs The State on 20 December, 1951

Bijjoy Chand Potra vs The State on 14 December, 1951

Y. Suresh Babu vs State Of A.P. And Anr. on 29 April, 1987

Bhaskar @ Prabaskar And Ors vs Inspector Of Police,Vellore on 22 September, 1999

Balram Singh & Anr vs State Of Punjab on 7 May, 2003

Dharmatma Singh vs Harminder Singh & Ors on 10 May, 2011

State Th. Cbi New Delhi vs Jitender Kumar Singh on 5 February, 2014



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 326 का विवरण :  -  326. भागतः एक न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा और भागतः दूसरे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर दोषसिद्धि या सुपुर्दगी --

(1) जब कभी किसी जांच या विचारण में साक्ष्य को पूर्णतः या भागतः सुनने और अभिलिखित करने के पश्चात् कोई [न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट] उसमें अधिकारिता का प्रयोग नहीं कर सकता है और कोई अन्य न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट], जिसे ऐसी अधिकारिता है और जो उसका प्रयोग करता है, उसका उत्तरवर्ती हो जाता है, तो ऐसा उत्तरवर्ती [न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट] अपने पूर्ववर्ती द्वारा ऐसा अभिलिखित या भागतः अपने पूर्ववर्ती द्वारा अभिलिखित और भागतः अपने द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर कार्य कर सकता है।

परन्तु यदि उत्तरवर्ती न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की यह राय है कि साक्षियों में से किसी की जिसका साक्ष्य पहले ही अभिलिखित किया जा चुका है, अतिरिक्त परीक्षा करना न्याय के हित में आवश्यक है तो वह किसी भी ऐसे साक्षी को पुनः समन कर सकता है और ऐसी अतिरिक्त परीक्षा, प्रतिपरीक्षा और पुन:परीक्षा के, यदि कोई हो, जैसी वह अनुज्ञात करे, पश्चात् वह साक्षी उन्मोचित कर दिया जाएगा। 

(2) जब कोई मामला [एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को या एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को] इस संहिता के उपबंधों के अधीन अंतरित किया जाता है तब उपधारा (1) के अर्थ में पूर्वकथित मजिस्ट्रेट के बारे में समझा जाएगा। कि वह उसमें अधिकारिता का प्रयोग नहीं कर सकता है और पश्चात्कथित मजिस्ट्रेट उसका उत्तरवर्ती हो गया है।

(3) इस धारा की कोई बात संक्षिप्त विचारणों को या उन मामलों को लागू नहीं होती है, जिनमें कार्यवाहियाँ धारा 322 के अधीन रोक दी गई हैं या जिसमें कार्यवाहियाँ वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को धारा 325 के अधीन भेज दी गई हैं।


राज्य संशोधन

राजस्थान -- धारा 326 में--

(क) उपधारा (1) में “मजिस्ट्रेट” शब्द जहाँ कहीं आता है, के स्थान पर “जज या मजिस्ट्रेट” शब्द प्रतिस्थापित

किए जाएंगे।

(ख) उपधारा (2) में शब्दों “एक मजिस्ट्रेट से दूसरे मजिस्ट्रेट को” के पहले “एक जज से दूसरे जज को या” शब्द

अन्त:स्थापित किए जाएंगे।

[देखें राजस्थान एक्ट सख्या 10 सन् 1977, धारा 3 (3-9-1977 से प्रभावशील)]

उत्तरप्रदेश -- धारा 326 में--

(क) उपधारा (1) में शब्द “मजिस्ट्रेट" के लिए जहाँ कहीं आ रहा हो, शब्द “जज या मजिस्ट्रेट" प्रतिस्थापित

किए जाएंगे ।

(ख) उपधारा (2) में शब्द “एक मजिस्ट्रेट से किसी दूसरे मजिस्ट्रेट को” के पहले शब्द “एक जज से किसी दूसरे जज क या” शब्द अन्त:स्थापित किए जाएंगे।

[देखें उत्तरप्रदेश एक्ट संख्या 16 सन् 1976, धारा 8 (1-5-1976 से प्रभावशील)]



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