Section 317 CrPC

 

Section 317 CrPC in Hindi and English



Section 317 of CrPC 1973 :- 317. Provision for inquiries and trial being held in the absence of accused in certain cases —

(1) At any stage of an inquiry or trial under this Code, if the Judge or Magistrate is satisfied, for reasons to be recorded, that the personal attendance of the accused before the Court is not necessary in the interests of justice, or that the accused persistently disturbs the proceedings in Court, the Judge or Magistrate may, if the accused is represented by a pleader, dispense with his attendance and proceed with such inquiry or trial in his absence, and may, at any subsequent stage of the proceedings, direct the personal attendance of such accused.

(2) If the accused in any such case is not represented by a pleader, or if the Judge or Magistrate considers his personal attendance necessary, he may, if he thinks fit and for reasons to be recorded by him, either adjourn such inquiry or trial, or order that the case of such accused be taken up or tried separately.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 317 of Criminal Procedure Code 1973:

Sri Rameshwar Yadav vs The State Of Bihar on 16 March, 2018

M/S. Bhaskar Industries Ltd vs M/S. Bhiwani Denim & Apparels Ltd.on 27 August, 2001

Rajesh Ranjan Yadav @ Pappu Yadav vs Cbi Through Its Director on 30 November, 2007

Basavaraj R. Patil And Others vs State Of Karnataka And Others on 11 October, 2000

The State Of Maharashtra vs Dr. Praful B. Desai on 1 April, 2003

Keya Mukherjee vs Magma Leasing Limited & Anr on 8 April, 2008

Rasiklal vs Kishore on 20 February, 2009

State Of Punjab vs Hari Singh And Ors on 16 February, 2009

M/S Meters And Instruments vs Kanchan Mehta on 5 October, 2017

Social Action Forum vs Union Of India And Ors. Minstry Law on 14 September, 2018




दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 317 का विवरण :  -  17. कुछ मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में जांच और विचारण किए जाने के लिए उपबंध --

(1) इस संहिता के अधीन जांच या विचारण के किसी प्रक्रम में यदि न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट का उन कारणों से, जो अभिलिखित किए जाएंगे, समाधान हो जाता है कि न्यायालय के समक्ष अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी न्याय के हित में आवश्यक नहीं है या अभियुक्त न्यायालय की कार्यवाही में बार-बार विघ्न डालता है तो ऐसे अभियुक्त का प्रतिनिधित्व प्लीडर द्वारा किए जाने की दशा में, वह न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट उसकी हाजिरी से उसे अभिमुक्ति दे सकता है और उसकी अनुपस्थिति में ऐसी जांच या विचारण करने के लिए अग्रसर हो सकता है और कार्यवाही के किसी पश्चात्वर्ती प्रक्रम में ऐसे अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी का निदेश दे सकता है।

(2) यदि ऐसे किसी मामले में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व प्लीडर द्वारा नहीं किया जा रहा है अथवा यदि न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट का यह विचार है कि अभियुक्त की वैयक्तिक हाजिरी आवश्यक है तो यदि वह ठीक समझे तो, उन कारणों से, जो उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे, वह या तो ऐसी जांच या विचारण स्थगित कर सकता है या आदेश दे सकता है कि ऐसे अभियुक्त का मामला अलग से लिया जाए या विचारित किया जाए।



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