Section 30 Indian Evidence Act 1872

 

Section 30 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English 



Section 30 Evidence Act 1872 :Consideration of proved confession affecting person making it and others jointly under trial for same offence -- When more persons than one are being tried jointly for the same offence, and a confession made by one of such persons affecting himself and some other of such persons is proved, the Court may take into consideration such confession as against such other person as well as against the person who makes such confession

Explanation -- “Offence” as used in this section, includes the abetment of, or attempt to commit, the offence.

Illustrations

(a) A and B are jointly tried for the murder of C. It is proved that A said -- “B and I murdered C". The Court may consider the effect of this confession as against B.

(b) A is on his trial for the murder of C. There is evidence to show that C was murdered by A and B, and that B said -- "A and I murdered C”.

This statement may not be taken into consideration by the Court against A, as B is not being jointly tried.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 30 Indian Evidence Act 1872:

State Of Tamil Nadu Through vs Nalini And 25 Others on 11 May, 1999

Hari Charan Kurmi And Jogia Hajam vs State Of Bihar on 3 February, 1964

S. Shanmugadivelu, S. Nalini & vs State By D.S.P., Cbi, Sit, Chennai on 11 May, 1999

T. Suthenthiraraja,P vs State By D.S.P., Cbi, Sit, Chennai on 8 October, 1999

State Of Tamil Nadu Through vs Nalini And 25 Others on 11 May, 1999

Mohmed Amin @ Amin C.R.M.Shaikh & vs C.B.I Tr.Its Director on 18 November, 2008

State Of Maharashtra vs Kamal Ahmed Mohd. Vakil Ansari &  on 14 March, 2013

State (N.C.T. Of Delhi) vs Navjot Sandhu@ Afsan Guru on 4 August, 2005

Kartar Singh vs State Of Punjab on 11 March, 1994

Raja @ Ayyappan vs State Of Tamil Nadu on 1 April, 2020



भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 30 का विवरण :  -  साबित संस्वीकृति को, जो उसे करने वाले व्यक्ति तथा एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित अन्य को प्रभावित करती है विचार में लेना -- जबकि एक से अधिक व्यक्ति एक ही अपराध के लिए संयुक्त रूप से विचारित हैं, तथा ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक के द्वारा, अपने को और ऐसे व्यक्तियों में से किसी अन्य को प्रभावित करने वाली की गई संस्वीकृति को साबित किया जाता है, तब न्यायालय ऐसी संस्वीकृति को ऐसे अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध तथा ऐसी संस्वीकृति करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध विचार में ले सकेगा।

स्पष्टीकरण -- इस धारा में प्रयुक्त “अपराध" शब्द के अन्तर्गत उस अपराध का दुष्प्रेरण या उसे करने का प्रयत्न आता है।

दृष्टांत

(क) क और ख को ग की हत्या के लिए संयुक्ततः विचारित किया जाता है। यह साबित किया जाता है कि क ने कहा,-- "ख और मैने ग की हत्या की है "ख के विरुद्ध इस संस्वीकृति के प्रभाव पर न्यायालय विचार कर सकेगा।

(ख) ग की हत्या करने के लिए क का विचारण हो रहा है। यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य है कि ग की हत्या क और ख द्वारा की गई थी और यह कि ख ने कहा था कि “क और मैने ग की हत्या की है।

न्यायालय इस कथन को क के विरुद्ध विचारार्थ नहीं ले सकेगा, क्योंकि ख संयुक्ततः विचारित नहीं हो रहा है।



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