Section 265C CrPC

 Section 265C CrPC in Hindi and English



Section 265C of CrPC 1973 :- 265 C. Guidelines for mutually satisfactory disposition – In working out a mutually satisfactory disposition under clause (a) of sub-section (4) of section 265B, the Court shall follow the following procedure, namely :

(a) in a case instituted on a police report, the Court shall issue notice to the Public Prosecutor, the police officer who has investigated the case, the accused and the victim of the case to participate in the meeting to work out a satisfactory disposition of the case :

Provided that throughout such process of working out a satisfactory disposition of the case, it shall be the duty of the Court to ensure that the entire process is completed voluntarily by the parties participating in the meeting :

Provided further that the accused, if he so desires, may participate in such meeting with his pleader, if any, engaged in the case;

(b) in a case instituted otherwise than on police report, the Court shall issue notice to the accused and the victim of the case to participate in a meeting to work out a satisfactory disposition of the case : Provided that it shall be the duty of the Court to ensure, throughout such process of working out a satisfactory disposition of the case, that it is completed voluntarily by the parties participating in the meeting :

Provided further that if the victim of the case or the accused, as the case may be, so desires, he may participate in such meeting with his pleader engaged in the case.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 265C of Criminal Procedure Code 1973:


दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 265ग  का विवरण :  -  265 ग. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत -- धारा 265-ख की उपधारा (4) के खंड (क) के अधीन पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए, न्यायालय निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाएगा, अर्थात् :

(क) पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित किसी मामले में, न्यायालय, लोक अभियोजक, पुलिस अधिकारी, जिसने मामले का अन्वेषण किया है, अभियुक्त और मामले में पीड़ित व्यक्ति को, उस मामले का संतोषप्रद निपटारा करने के लिए बैठक में भाग लेने के लिए सूचना जारी करेगा: परंतु मामले के संतोषप्रद निपटारे की ऐसी संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान न्यायालय का यह कर्तव्य होगा कि वह सुनिश्चित करे कि सारी प्रक्रिया बैठक में भाग लेने वाले पक्षकारों द्वारा स्वेच्छा से पूर्ण की गई है :

परंतु यह और कि अभियुक्त, यदि ऐसी वांछा करे, तो वह मामले में लगाए गए अपने अभिवक्ता, यदि कोई हो, के साथ इस बैठक में भाग ले सकेगा।

(ख) पुलिस रिपोर्ट से अन्यथा संस्थित मामले में, न्यायालय अभियुक्त और उस मामले में पीड़ित व्यक्ति को मामले के संतोषप्रद निपटारे के लिए की जाने वाली बैठक में भाग लेने के लिए सूचना जारी करेगा: परन्तु न्यायालय का यह कर्तव्य होगा कि वह मामले का संतोषप्रद निपटारा करने की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित करे कि उसे बैठक में भाग लेने वाले पक्षकारों द्वारा स्वेच्छा से पूरा किया गया है :

परन्तु यह और कि यदि, यथास्थिति, मामले में, पीड़ित व्यक्ति या अभियुक्त, यदि ऐसी वांछा करे, तो वह उस मामले में लगाए गए अपने अभिवक्ता के साथ उस बैठक में भाग ले सकेगा।


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