Section 253 CrPC

 Section 253 CrPC in Hindi and English



Section 253 of CrPC 1973 :- 253. Conviction on plea of guilty in absence of accused in petty cases — 

(1) Where a summons has been issued under section 206 and the accused desires to plead guilty to the charge without appearing before the Magistrate, he shall transmit to the Magistrate, by post or by messenger, a letter containing his plea and also the amount of fine specified in the summons.

(2) The Magistrate may, in his discretion, convict the accused in his absence, on his plea of guilty and sentence him to pay the fine specified in the summons, and the amount transmitted by the accused shall be adjusted towards that fine, or where a pleader authorised by the accused in this behalf pleads guilty on behalf of the accused, the Magistrate shall record the plea as nearly as possible in the words used by the pleader and may, in his discretion, convict the accused on such plea and sentence him as aforesaid.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 253 of Criminal Procedure Code 1973:

East India Commerclal Co., Ltd vs The Collector Of Customs, on 4 May, 1962

S. K. Kashyap & Anr vs The State Of Rajasthan on 2 March, 1971

Sudarshanacharya vs Purushottamacharya & Anr on 4 September, 2012

Hardeep Singh vs State Of Punjab & Ors on 10 January, 2014

Hardeep Singh vs State Of Punjab & Ors on 10 January, 1947

Mahant Abhey Dass vs S. Gurdial Singh And Ors. on 11 February, 1971




दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 253 का विवरण :  -  253. छोटे मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि -- 

(1) जहाँ धारा 206 के अधीन समन जारी किया जाता है और अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर हुए बिना आरोप का दोषी होने का अभिवचन करना चाहता है, वहाँ वह अपना अभिवाक् अन्तर्विष्ट करने वाला एक पत्र और समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की रकम डाक या संदेशवाहक द्वारा मजिस्ट्रेट को भेजेगा।

(2) तब मजिस्ट्रेट, स्वविवेकानुसार, अभियुक्त को उसके दोषी होने के अभिवाक् के आधार पर उसकी अनुपस्थिति में दोषसिद्ध करेगा और समन में विनिर्दिष्ट जुर्माना देने के लिए दण्डादेश देगा और अभियुक्त द्वारा भेजी गई रकम उस जुर्माने में समायोजित की जाएगी या जहाँ अभियुक्त द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत प्लीडर अभियुक्त की ओर से उसके दोषी होने का अभिवचन करता है वहाँ मजिस्ट्रेट यथासंभव प्लीडर द्वारा प्रयुक्त किए गए शब्दों में अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और स्वविवेकानुसार उस अभियुक्त को ऐसे अभिवाक् पर दोषसिद्ध कर सकेगा और उसे यथापूर्वोक्त दण्डादेश दे सकेगा।



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