Section 243 CrPC

 Section 243 CrPC in Hindi and English



Section 243 of CrPC 1973 :- 243. Evidence for defence —

(1) The accused shall then be called upon to enter upon his defence and produce his evidence; and if the accused puts in any written statement, the Magistrate shall file it with the record.

(2) If the accused, after he has entered upon his defence, applies to the Magistrate to issue any process for compelling the attendance of any witness for the purpose of examination or cross-examination, or the production of any document or other thing, the Magistrate shall issue such process unless he considers that such application should be refused on the ground that it is made for the purpose of vexation or delay or for defeating the ends of justice and such ground shall be recorded by him in writing :

Provided that, when the accused has cross-examined or had the opportunity of cross-examining any witness before entering on his defence, the attendance of such witness shall not be compelled under this section, unless the Magistrate is satisfied that it is necessary for the ends of justice.

(3) The Magistrate may, before summoning any witness on an application under sub-section (2), require that the reasonable expenses incurred by the witness in attending for the purposes of the trial be deposited in Court.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 243 of Criminal Procedure Code 1973:

Mahant Kaushalya Das vs State Of Madras on 7 May, 1965

Mrs. Kalyani Baskar vs Mrs. M. S. Sampoornam on 11 December, 2006

T. Nagappa vs Y.R. Muralidhar on 24 April, 2008

Eradu And Ors. vs State Of Hyderabad on 1 November, 1955

G. Someshwar Rao vs Samineni Nageshwar Rao & Anr on 29 July, 2009

Arivazhagan vs State, Represented By Inspector on 8 March, 2000

V. C. Shukla vs State (Delhi Administration) on 11 April, 1980

Natasha Singh vs Cbi (State) on 8 May, 2013

Amarsang Nathaji As Himself And As vs Hardik Harshadbhai Patel And Ors on 23 November, 2016

Pritish vs State Of Maharashtra & Ors on 21 November, 2001



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 243 का विवरण :  -  243. प्रतिरक्षा का साक्ष्य -- 

(1) तब अभियुक्त से अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे और अपना साक्ष्य पेश करे; और यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख में फाइल करेगा।

(2) यदि अभियुक्त अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करने के पश्चात् मजिस्ट्रेट से आवेदन करता है कि वह परीक्षा या प्रतिरक्षा के, या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के प्रयोजन से हाजिर होने के लिए किसी साक्षी को विवश करने के लिए कोई आदेशिका जारी करे तो, मजिस्ट्रेट ऐसी आदेशिका जारी करेगा जब तक उस का यह विचार न हो कि ऐसा आवेदन इस आधार पर नामंजूर कर दिया जाना चाहिए कि वह तंग करने के या विलंब करने के या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के प्रयोजन से किया गया है, और ऐसा कारण उसके द्वारा लेखबद्ध किया जाएगा :

परन्तु जब अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करने के पूर्व अभियुक्त ने किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा कर ली है या उसे प्रतिपरीक्षा करने का अवसर मिल चुका है तब ऐसे साक्षी को हाजिर होने के लिए इस धारा के अधीन तब तक विवश नहीं किया जाएगा जब तक मजिस्ट्रेट का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसा करना न्याय के प्रयोजनों के लिए आवश्यक है।

(3) मजिस्ट्रेट उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन पर किसी साक्षी को समन करने के पूर्व यह अंपेक्षा कर सकता है कि विचारण के प्रयोजन के लिए हाजिर होने में उस साक्षी द्वारा किए जाने वाले उचित व्यय न्यायालय में जमा कर दिए जाएँ।



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