Section 242 CrPC

 Section 242 CrPC in Hindi and English



Section 242 of CrPC 1973 :- 242. Evidence for prosecution -- 

(1) If the accused refuses to plead or does not plead, or claims to be tried or the Magistrate does not convict the accused under section 241, the Magistrate shall fix a date for the examination of witnesses.

Provided that the Magistrate shall supply in advance to the accused, the statement of witnesses recorded during investigation by the police.

(2) The Magistrate may, on the application of the prosecution, issue a summons to any of its witnesses directing him to attend or to produce any document or other things.

(3) On the date so fixed, the Magistrate shall proceed to take all such evidence as may be produced in support of the prosecution :

Provided that the Magistrate may permit the cross-examination of any witness to be deferred until any other witness or witnesses have been examined or recall any witness for further cross-examination.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 242 of Criminal Procedure Code 1973:

State Of Karnataka vs Annegowda on 13 July, 2006

P.Sanjeeva Rao vs State Of A.P on 2 July, 2012

Hardeep Singh vs State Of Punjab & Ors on 10 January, 2014

Hardeep Singh vs State Of Punjab & Ors on 10 January, 1947

Asian Resurfacing Of Road Agency vs Central Bureau Of Investigation on 28 March, 2018



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 242 का विवरण :  -  242. अभियोजन के लिए साक्ष्य -

(1) यदि अभियुक्त अभिवचन करने से इंकार करता है या अभिवचन नहीं करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है या मजिस्ट्रेट अभियुक्त को धारा 241 के अधीन दोषसिद्ध नहीं करता है तो वह मजिस्ट्रेट साक्षियों की परीक्षा के लिए तारीख नियत करेगा |

परन्तु यह कि पुलिस द्वारा अन्वेषण के दौरान अभिलिखित साक्षियों के कथनों को, मजिस्ट्रेट अभियुक्त को अग्रिम में प्रदान करेगा ।

(2) मजिस्ट्रेट अभियोजन के आवेदन पर उसके साक्षियों में से किसी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने का निदेश देने वाला समन जारी कर सकता है।

(3) ऐसी नियत तारीख पर मजिस्ट्रेट ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए अग्रसर होगा जो अभियोजन के समर्थन में पेश किया जाता है :

परन्तु मजिस्ट्रेट किसी साक्षी की प्रतिपरीक्षा तब तक के लिए, जब तक किसी अन्य साक्षी या साक्षियों की परीक्षा नहीं कर ली जाती है, आस्थगित करने की अनुज्ञा दे सकेगा या किसी साक्षी को अतिरिक्त प्रतिपरीक्षा के लिए पुन: बुला सकेगा।



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