Section 24 Motor Vehicles Act,1988


Section 24 Motor Vehicles Act, 1988 in Hindi and English



Section 24 of MV Act 1988 :-  Endorsement -- (1) The Court or authority making an order of disqualification shall endorse or cause to be endorsed upon the driving licence if any, held by the person disqualified, particulars of the order of disqualification and of any conviction of an offence in respect of which an order of disqualification is made; and particulars of any cancellation or variation of an order of disqualification made under sub-section (3) of section 23 shall be similarly so endorsed.

(2) A Court by which any person is convicted of an offence under this Act as may be prescribed by the Central Government, having regard to the objects of this Act, shall whether or not a disqualification order is made in respect of such conviction, endorse or cause to be endorsed particulars of such conviction on any driving licence held by the person convicted.

(3) Any person accused of an offence prescribed under sub-section (2) shall when attending the Court bring with him his driving licence if it is in his possession.

(4) Where any person is convicted of any offence under this Act and sentenced to imprisonment for a period exceeding three months, the Court awarding the sentence shall endorse the fact of such sentence upon the driving licence of the person concerned and the prosecuting authority shall intimate the fact of such endorsement to the authority by which the driving licence was granted or last renewed.

(5) When the driving licence is endorsed or caused to be endorsed by any Court, such Court shall send the particulars of the endorsement to the licensing authority by which the driving licence was granted or last renewed.

(6) Where on an appeal against any conviction or order of a Court, which has been endorsed on a driving licence, the appellate court varies or sets aside the conviction or order, the appellate court shall inform the licensing authority by which the driving licence was granted or last renewed and such authority shall amend or cause to be amended the endorsement.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 24 of Motor Vehicles Act, 1988:

Trishala Jain & Anr vs State Of Uttaranchal & Anr on 5 May, 2011

Vijay Kumar Sharma & Ors. Etc vs State Of Karnataka & Ors. Etc on 27 February, 1990

G. Govindan vs New India Assurance Co. Ltd. And on 8 April, 1999

National Insurance Co. Ltd vs Swaran Singh & Ors on 5 January, 2004

Ishwar Chandra & Ors vs The Oriental Insurance Co. Ltd. & on 8 March, 2007

Sarla Verma & Ors vs Delhi Transport Corp.& Anr on 15 April, 2009

A Secretary, Regional Transport vs D.P. Sharma And Others on 12 December, 1988

Commissioner Of Com.Taxes, Tvm vs M/S. Ktc Automobiles on 29 January, 2016

Singh Ram vs Nirmala And Ors. on 6 March, 2018


मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 24 का विवरण :  -  पृष्ठांकन -- (1) वह न्यायालय या प्राधिकारी, जिसने निरर्हता का आदेश दिया है, निरर्हता के आदेश की तथा उस अपराध के लिए दोषसिद्धि की, जिसके संबंध में निरर्हता का आदेश दिया गया है, विशिष्टियाँ उस चालन-अनुज्ञप्ति पर, यदि कोई हो, पृष्ठांकित करेगा या करवाएगा जो निरहित व्यक्ति द्वारा धारित है तथा धारा 23 की उपधारा (3) के अधीन दिए गए निरर्हता के आदेश को रद्द करने या उसमें परिवर्तन करने की विशिष्टियां भी उसी प्रकार पृष्ठांकित की जाएंगी।

(2) जिस न्यायालय ने किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, विहित किया जाए, चाहे ऐसी दोषसिद्धि के संबंध में निरर्हता का आदेश दिया गया हो या नहीं, दोषसिद्धि की विशिष्टिया उस चालन-अनुज्ञप्ति पर पृष्ठाकित करेगा या करवाएगा जो दोषसिद्ध किए गए व्यक्ति द्वारा धारित है । 

(3) जो व्यक्ति, उपधारा (2) के अधीन विहित किसी अपराध के लिए अभियुक्त है, वह न्यायालय में हाजिर होते समय अपनी चालन-अनुज्ञप्ति, यदि वह उसके पास हो, अपने साथ लाएगा ।

(4) जहां किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध, और तीन मास से अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाता है, वहां दंडादेश अधिनिर्णीत करने वाला न्यायालय, संबंधित व्यक्ति की चालन-अनुज्ञप्ति पर ऐसे दंडादेश के तथ्य को पृष्ठांकित करेगा और अभियोजन प्राधिकारी ऐसे पृष्ठांकन के तथ्य की सूचना उस प्राधिकारी को भेजेगा, जिसने चालन-अनुज्ञप्ति दी थी या अंतिम बार नवीकृत की थी।

(5) जब चालन-अनुज्ञप्ति किसी न्यायालय द्वारा पृष्ठांकित की जाती है या पृष्ठांकित कराई जाती है, तब ऐसा न्यायालय पृष्ठांकन की विशिष्टियां उस अनुज्ञापन प्राधिकारी को भेजेगा जिसने चालन-अनुज्ञप्ति दी थी या अंतिम बार नवीकृत की थी ।

(6) जहां किसी न्यायालय द्वारा की गई दोषसिद्धि या आदेश के विरुद्ध, जो चालन-अनुज्ञप्ति पर पृष्ठांकित किया गया है, किसी अपील में अपील न्यायालय दोषसिद्धि या आदेश में परिवर्तन कर देता है या उसे अपास्त कर देता है वहां अपील न्यायालय उस अनुज्ञापन प्राधिकारी को सूचित करेगा जिसने चालन-अनुज्ञप्ति दी थी या अंतिम बार नवीकृत की थी और ऐसा प्राधिकारी पृष्ठांकन में संशोधन करेगा या संशोधन करवाएगा ।



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