Section 204 CrPC

 

Section 204 CrPC in Hindi and English



Section 204 of CrPC 1973 :- 204. - Issue of process -

(1) If in the opinion of a Magistrate taking cognizance of an offence there is sufficient ground for proceeding and the case appears to be

(a) a summons-case, he shall issue his summons for the attendance of the accused, or

(b) a warrant-case, he may issue a warrant, or, if he thinks fit, a summons, for causing the accused to be brought or to appear at a certain time before such Magistrate or (if he has no jurisdiction himself) some other Magistrate having jurisdiction. 

(2) No summons or warrant shall be issued against the accused under sub-section (1) until a list of the prosecution witnesses has been filed.

(3) In a proceeding instituted upon a complaint made in writing, every summons or warrant issued under sub-section (1) shall be accompanied by a copy of such complaint.

(4) When by any law for the time being in force any process-fees or other fees are payable, no process shall be issued until the fees are paid and if such fees are not paid within a reasonable time, the Magistrate may dismiss the complaint.

(5) Nothing in this section shall be deemed to affect the provisions of section 87.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 204 of Criminal Procedure Code 1973:

Nupur Talwar vs Cbi & Anr on 7 June, 2012

Manharibhai Muljibhai Kakadia & vs Shaileshbhai Mohanbhai Patel & on 1 October, 2012

Rosy And Anr vs State Of Kerala And Ors on 10 January, 2000

Tula Ram & Ors vs Kishore Singh on 5 October, 1977

Dharam Pal & Ors vs State Of Haryana & Anr on 18 July, 2013

Pramatha Nath Taluqdar vs Saroj Ranjan Sarkar on 21 December, 1961

Devendra Kishanlal Dagalia vs Dwarkesh Diamonds Pvt Ltd And Ors on 25 November, 2013

Ajoy Kumar Ghose vs State Of Jharkhand & Anr on 18 March, 2009

Kishun Singh And Ors vs State Of Bihar on 11 January, 1993

Shivjee Singh vs Nagendra Tiwary & Ors on 6 July, 2010



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 204 का विवरण :  -  204. - आदेशिका का जारी किया जाना --

(1) यदि किसी अपराध का संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट की राय में कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार हैं और --

(क) मामला समन-मामला प्रतीत होता है तो वह अभियुक्त की हाजिरी के लिए समन जारी करेगा; अथवा

(ख) मामला वारण्ट-मामला प्रतीत होता है तो वह अपने या (यदि उसकी अपनी अधिकारिता नहीं है तो) अधिकारिता वाले किसी अन्य मजिस्ट्रेट के समक्ष अभियुक्त के निश्चित समय पर लाए जाने या हाजिर होने के लिए वारण्ट, या यदि ठीक समझता है समन, जारी कर सकता है।

(2) अभियुक्त के विरुद्ध उपधारा (1) के अधीन तब तक कोई समन या वारण्ट जारी नहीं किया जाएगा जब तक अभियोजन के साक्षियों की सूची फाइल नहीं कर दी जाती है।

(3) लिखित परिवाद पर संस्थित कार्यवाही में उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए प्रत्येक समन या वारण्ट के साथ उस परिवाद की एक प्रतिलिपि होगी।

(4) जब तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन कोई आदेशिका फीस या अन्य फीस संदेय है तब कोई आदेशिका तब तक जारी नहीं की जाएगी जब तक फीस नहीं दे दी जाती है और यदि ऐसी फीस उचित समय के अन्दर नहीं दी जाती है तो मजिस्ट्रेट परिवाद को खारिज कर सकता है।

(5) इस धारा की कोई बात धारा 87 के उपबंधों पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी।



To download this dhara / Section of CrPC in pdf format use chrome web browser and use keys [Ctrl + P] and save as pdf.

Comments

Popular posts from this blog

भारतीय संविधान से संबंधित 100 महत्वपूर्ण प्रश्न उतर

संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख | Characteristics of the Constitution of India

संविधान के अनुच्छेद 19 में मूल अधिकार | Fundamental Right of Freedom in Article 19 of Constitution