Section 202 CrPC

 

Section 202 CrPC in Hindi and English



Section 202 of CrPC 1973 :- 202. Postponement of issue of process ---

 

(1) Any Magistrate, on receipt of a .complaint of an offence of which he is authorised to take cognizance or which has been made over to him under section 192, may, if he thinks fit, '[and shall, in a case where the accused is residing at a place beyond the area in which he exercises his jurisdiction] postpone the issue of process against the accused and either inquire into the case himself or direct an investigation to be made by a police officer or by such other person as he thinks fit, for the purpose of deciding whether or not there is sufficient ground for proceeding :

Provided that no such direction for investigation shall be made

(a) where it appears to the Magistrate that the offence complained of is triable exclusively by the Court of Sessions; or.

(b) where the complaint has not been made by a Court, unless the complainant and the witnesses present (if any) have been examined on oath under section 200.

(2) In an inquiry under sub-section (1), the Magistrate may, if he thinks fit, take evidence of witnesses on oath :

Provided that if it appears to the Magistrate that the offence complained of is triable exclusively by the Court of Session, he shall call upon the complainant to produce all his .witnesses and examine them on oath.

(3) If an investigation under sub-section (1) is made by a person not being a police officer, he shall have for that investigation all the powers conferred by this Code on an officer in charge of a police station except the power to arrest without warrant.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 202 of Criminal Procedure Code 1973:

Rosy And Anr vs State Of Kerala And Ors on 10 January, 2000

Manharibhai Muljibhai Kakadia & vs Shaileshbhai Mohanbhai Patel & on 1 October, 2012

Rameshbhai Pandurao Hedau vs State Of Gujarat on 19 March, 2010

Chandra Deo Singh vs Prokash Chandra Bose & Anr on 22 January, 1963

Tula Ram & Ors vs Kishore Singh on 5 October, 1977

National Bank Of Oman vs Barakara Abdul Aziz & Anr on 3 December, 2012

Smt. Nagawwa vs Veeranna Shivallngappa Konjalgi on 23 April, 1976

Nupur Talwar vs Cbi & Anr on 7 June, 2012

Jamuna Singh And Others vs Bhadai Sah on 4 October, 1963

Shivjee Singh vs Nagendra Tiwary & Ors on 6 July, 2010



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 202 का विवरण :  -  202. आदेशिका के जारी किए जाने को मुल्तवी करना --

(1) यदि कोई मजिस्ट्रेट ऐसे अपराध का परिवाद प्राप्त करने पर, जिसका संज्ञान करने के लिए वह प्राधिकृत है या जो धारा 192 के अधीन उसके हवाले किया गया है, ठीक समझता है तो और ऐसे मामले में जहाँ अभियुक्त ऐसे किसी स्थान में निवास कर रहा है जो उस क्षेत्र से परे है, जिसमें वह अपनी अधिकारिता का प्रयोग करता है अभियुक्त के विरुद्ध आदेशिका का जारी किया जाना मुल्तवी कर सकता है और यह विनिश्चित करने के प्रयोजन से कि कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार है अथवा नहीं, या तो स्वयं ही मामले की जांच कर सकता है या किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या अन्य ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसको वह ठीक समझे अन्वेषण किए जाने के लिए निदेश दे सकता है :

परन्तु अन्वेषण के लिए ऐसा कोई निदेश वहाँ नहीं दिया जाएगा--

(क) जहाँ मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि वह अपराध जिसका परिवाद किया गया है अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है; अथवा

(ख) जहाँ परिवाद किसी न्यायालय द्वारा नहीं किया गया है जब तक कि परिवादी की या उपस्थित साक्षियों की (यदि कोई हो) धारा 200 के अधीन शपथ पर परीक्षा नहीं कर ली जाती है।

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी जांच में यदि मजिस्ट्रेट ठीक समझता है तो साक्षियों का शपथ पर साक्ष्य ले सकता है : 

परन्तु यदि मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि वह अपराध जिसका परिवाद किया गया है अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है तो यह परिवादी से अपने सब साक्षियों को पेश करने की अपेक्षा करेगा और उनकी शपथ पर परीक्षा करेगा।

(3) यदि उपधारा (1) के अधीन अन्वेषण किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो पुलिस अधिकारी नहीं है तो उस अन्वेषण के लिए उसे वारण्ट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति के सिवाय पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को इस संहिता द्वारा प्रदत्त सभी शक्तियाँ होंगी।



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