Section 200 Motor Vehicles Act, 1988


Section 200 Motor Vehicles Act, 1988 in Hindi and English

Section 200 of MV Act 1988 :- Composition of certain offences -- (1) Any offence whether committed before or after the commencement of this Act [punishable under section 177, section 178, section 179, section 180, section 181, section 182, sub-section (1) or subsection (3) or sub-section (4) of section 182A, section 182B, sub-section (1) or subsection (2) of section 183, section 184 only to the extent of use of handheld communication devices, section 186, section 189, sub-section (2) of section 190, section 192, section 192A, section 194, section 1944, section 194B, section 1940, section 1940, section 1948, section 194F, section 196, section 198] may either before or after the institution of the prosecution, be compounded by such officers or authorities and for such amount as the State Government may, by notification in the Official Gazette, specify in this behalf :

[Provided that the State Government may, in addition to such amount, require the offender to undertake a period of community service.]

(2) Where an offence has compounded under sub-section (1), the offender, if in custody, shall be discharged and no further proceedings shall be taken against him in respect of such offence :

[Provided that notwithstanding compounding under this section, such offence shall be deemed to be a previous commission of the same offence for the purpose of determining whether a subsequent offence has been committed:

Provided further that compounding of an offence will not discharge the offender from proceedings under sub-section (4) of section 206 or the obligation to complete a driver refresher training course, or the obligation to complete community service, if applicable.]

Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 200 of Motor Vehicles Act, 1988:

Paramjit Bhasin And Ors vs Union Of India And Ors on 9 November, 2005

P. Ratnakar Rao & Ors vs Government Of Andhra Pradesh & Ors on 10 May, 1996

M/S Sharma Transports vs State Of Maharashtra & Ors on 2 August, 2011

मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 200 का विवरण :  -  कतिपय अपराधों का शमन -- (1) [धारा 177, धारा 178, धारा 179, धारा 180, धारा 181, धारा 182, धारा 182क की उपधारा (1) या उपधारा (3) या उपधारा (4), धारा 182ख, धारा 183 की उपधारा (1) या उपधारा (2), हस्तधारित संसूचना युक्तियों के उपयोग के विस्तार तक ही धारा 184, धारा 186, धारा 189, धारा 190 की उपधारा (2), धारा 192, धारा 192क, धारा 194, धारा 194क, धारा 194ख, धारा 194ग, धारा 194घ, धारा 194ङ, धारा 194च, धारा 196, धारा 198 के अधीन दण्डनीय] किसी अपराध का, चाहे वह इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व किया गया हो या पश्चात् किया गया हो, ऐसे अधिकारियों या प्राधिकारियों द्वारा और ऐसी राशि के लिए जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, शमन या तो अभियोजन संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात् किया जा सकेगा :

[पंरतु यह कि राज्य सरकार ऐसी रकम के अतिरिक्त, अपराधी से सामुदायिक सेवा की अवधि का वचनबंध करने की अपेक्षा कर सकेगी ।]

(2) जहां किसी अपराध का शमन उपधारा (1) के अधीन किया गया है वहां अपराधी को, यदि वह अभिरक्षा में हो, निर्मुक्त कर दिया जाएगा और ऐसे अपराध के बारे में उसके विरुद्ध आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी :

[परंतु इस धारा के अधीन शमन के होते हुए भी, ऐसा अपराध यह अवधारण करने के प्रयोजन के लिए उसी अपराध के पूर्व में किया जाना समझा जाएगा कि क्या पश्चातवर्ती अपराध किया गया है:

परंतु यह और कि किसी अपराध का शमन अपराधी को धारा 206 की उपधारा (4) के अधीन कार्यवाहियों से या चालक पुनश्चर्या प्रशिक्षण पाठयक्रम पूरा करने की बाध्यता या संपूर्ण सामदायिक सेवा की बाध्यता से यदि लागू हो, उन्मुक्त नहीं करेगा ।]

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