Section 196 CrPC

 Section 196 CrPC in Hindi and English


Section 196 of CrPC 1973 :- 196. Prosecution for offences against the State and for criminal conspiracy to commit such offence — (1) No Court shall take cognizance of -

(a) any offence punishable under Chapter VI or under section 153A, [section 295A or sub-section (1) of section 505] of the Indian Penal Code (45 of 1860), or

(b) a criminal conspiracy to commit such offence, or

(c) any such abetment, as is described in section 108A of the Indian Penal Code (45 of 1860), except with the previous sanction of the Central Government or of the State Government.

(1A) No Court shall take cognizance of

(a) any offence punishable under section 153B or sub-section (2) or sub-section (3) of section 505 of the Indian Penal Code (45 of 1860), or

(b) a criminal conspiracy to commit such offence, except with the previous sanction of the Central Government or of the State Government or of the District Magistrate.

(2) No Court shall take cognizance of the offence of any criminal conspiracy punishable under section 120B of the Indian Penal Code (45 of 1860), other than a criminal conspiracy to commit an offence punishable with death, imprisonment for life or rigorous imprisonment for a term of two years or upwards, unless the State Government or the District Magistrate has consented in writing to the initiation of the proceedings :

Provided that where the criminal conspiracy is one to which the provisions of section 195 apply, no such consent shall be necessary.

(3) The Central Government or the State Government may, before according sanction under sub-section (1) or sub-section (1A) and the District Magistrate may, before according sanction under sub-section (1A) and the State Government or the District Magistrate may, before giving consent under sub-section (2), order a preliminary investigation by a police officer not being below the rank of Inspector, in which case such police officer shall have the powers referred to in sub-section (3) of section 155.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 196 of Criminal Procedure Code 1973:

Documents citing Section 196 in The Code Of Criminal Procedure, 1973

State (N.C.T. Of Delhi) vs Navjot Sandhu@ Afsan Guru on 4 August, 2005

Bakhshish Singh Brar vs Smt. Gurmej Kaur And Anr on 12 October, 1987

Kamlapati Trivedi vs State Of West Bengal on 13 December, 1978

Rajdeep Sardesai vs State Of A.P.& Ors on 14 May, 2015

Union Of India vs Prakash P. Hinduja & Anr on 7 July, 2003

Kanpur Development Authority vs Smt. Sheela Devi & Ors. Etc on 28 November, 2003

State Of Karnataka & Anr vs Pastor P. Raju on 4 August, 2006

Aleque Padamsee And Ors vs Union Of India And Ors on 18 July, 2007

S.Palani Velayutham & Ors vs Dist.Collector,Tirunvelveli,T.Nadu on 7 August, 2009

C.B.I., U.P vs Indra Bhushan Singh & Ors on 2 May, 2014



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 196 का विवरण :  -  196. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिये और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षड़यंत्र के लिए अभियोजन -- (1) कोई न्यायालय--

(क) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 6 के अधीन या धारा 153क, [धारा 295क या धारा 505 की उपधारा (1)] के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का, अथवा

(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड़यंत्र का, अथवा

(ग) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 108क में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं।

(1क) कोई न्यायालय --

(क) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 153ख या धारा 505 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का, अथवा

(ख) ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड़यंत्र का, संज्ञान, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं ।

(2) कोई न्यायालय भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 120ख के अधीन दण्डनीय किसी आपराधिक षड़यंत्र के किसी ऐसे अपराध का, जो मृत्यु, आजीवन कारावास, या दो वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कठिन कारावास से दण्डनीय अपराध करने के आपराधिक षड़यंत्र से भिन्न है, संज्ञान तब तक नहीं करेगा जब तक राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट ने कार्यवाही शुरू करने के लिए लिखित सम्मति नहीं दे दी है :परन्तु जहाँ आपराधिक षड़यंत्र ऐसा है जिसे धारा 195 के उपबंध लागू हैं वहाँ ऐसी कोई सम्मति आवश्यक न होगी।

(3) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार उपधारा (1) या उपधारा (1क) के अधीन मंजूरी देने के पूर्व और जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (1क) के अधीन मंजूरी देने से पूर्व, और राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (2) के अधीन सम्मति देने के पूर्व, ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का नहीं है, प्रारंभिक अन्वेषण किए जाने का आदेश दे सकता है और उस दशा में ऐसे पुलिस अधिकारी की वे शक्तियाँ होंगी जो धारा 155 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट हैं।



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