Section 19 Indian Evidence Act 1872

 



Section 19 Indian Evidence Act 1872 in Hindi and English 


Section 19 Evidence Act 1872 :Admissions by persons whose position must be proved as against party to suit -- Statements made by persons whose position or liability it is necessary to prove as against any party to the suit are admissions, if such statements would be relevant as against such persons in relation to such position or liability in a suit brought by or against them, and if they are made whilst the person making them occupies such position or is subject to such liability.


Illustration

A undertakes to collect rents for B.

B sues A for not collecting rent due from C to B.

A denies that rent was due from C to B.

A statement by C that he owed B rent is an admission, and is a relevant fact as against A, if A denies that C did owe rent to B.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 19 Indian Evidence Act 1872:

Kartar Singh vs State Of Punjab on 11 March, 1994

M/S Interglobe Aviation Ltd vs N.Satchidanand on 4 July, 2011

Romesh Chandra Mehta vs State Of West Bengal on 18 October, 1968

Nandini Satpathy vs Dani (P.L.) And Anr on 7 April, 1978

Balkishan A. Devidayal Etc vs State Of Maharashtra Etc on 31 July, 1980

S.P. Gupta vs President Of India And Ors. on 30 December, 1981

S.P. Gupta vs Union Of India & Anr on 30 December, 1981

C.B.I vs Ashok Kumar Aggarwal on 31 October, 2013

Badku Joti Savant vs State Of Mysore on 1 March, 1966

National Insurance Co. Ltd vs Vidhyadhar Mahariwala & Ors on 17 September, 2008


भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 19 का विवरण :  -  उन व्यक्तियों द्वारा स्वीकृतियाँ जिनकी स्थिति वाद के पक्षकारों के विरुद्ध साबित की जानी चाहिए -- वे कथन, जो उन व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं जिनकी वाद के किसी पक्षकार के विरुद्ध स्थिति या दायित्व साबित करना आवश्यक है, स्वीकृतियाँ हैं, यदि ऐसे कथन ऐसे व्यक्तियों द्वारा, या उन पर लाए गए वाद में ऐसी स्थिति या दायित्व के संबंध में ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध सुसंगत होते और यदि वे उस समय किए गए हों जबकि उन्हें करने वाला व्यक्ति ऐसी स्थिति ग्रहण किए हुए है या ऐसे दायित्व के अधीन है।

दृष्टांत

ख के लिए भाटक संग्रह का दायित्व क लेता है।

ग द्वारा ख को शोध्य भाटक संग्रह न करने के लिए क पर ख वाद लाता है।

क इस बात का प्रत्याख्यान करता है कि ग से ख को भाटक देय था।

ग द्वारा यह कथन कि उस पर ख को भाटक देय है स्वीकृति है, और यदि क इस बात से इंकार करता है कि ग द्वारा ख को भाटक देय था तो वह क के विरुद्ध सुसंगत तथ्य है।


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