Section 185 Motor Vehicles Act, 1988

 


Section 185 Motor Vehicles Act, 1988 in Hindi and English



Section 185 of MV Act 1988 :- Driving by a drunken person or by a person under the influence of drugs -- Whoever, while driving, or attempting to drive, a motor vehicle --

(a) has, in his blood, alcohol exceeding 30 mg. per 100 ml. of blood to detected in a test by a breath analyser, [or in any other test including a laboratory test], or

(b) is under the influence of a drug to such an extent as to be incapable of exercising proper control over the vehicle,

shall be punishable for the first offence with imprisoninent for a term which may extend to six months, or with fine [of ten thousand rupees], or with both; and for a second or subsequent offence, [***], with imprisonment for a term which may extend to two years, or with fine [of fifteen thousand rupees], or with both.

Explanation -- For the purposes of this section, the expression “drug“ means any intoxicant other than alcohol, natural or synthetic, or any natural material or any salt, or preparation of such substance or material as may be notified by the Central Government under this Act and includes a narcotic drug and psychotropic substance as defined in clause (xiv) and clause (xxiii) of section 2 of the Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 (61 of 1985).



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 185 of Motor Vehicles Act, 1988:

Iffco Tokio General Insurance vs Pearl Beverages Ltd. on 12 April, 2021

State Tr.P.S.Lodhi Colony,New vs Sanjeev Nanda on 3 August, 2012

The State Of Tamil Nadu Rep. By vs K. Balu & Anr on 15 December, 2016

Alister Anthony Pareira vs State Of Maharashtra on 12 January, 2012

S.Rajaseekaran vs Union Of India & Ors on 22 April, 2014

S.Rajaseekaran vs Union Of India & Ors on 22 April, 1947

The State Of Arunachal Pradesh vs Ramchandra Rabidas @ Ratan  on 4 October, 2019

The State Of Tamil Nadu Rep. By vs K. Balu & Anr on 31 March, 2017

Sharda vs Dharmpal on 28 March, 2003

Selvi & Ors vs State Of Karnataka & Anr on 5 May, 2010



मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 185 का विवरण :  -  किसी मत्त व्यक्ति द्वारा या मादक द्रव्यों के असर में होते हुए किसी व्यक्ति द्वारा मोटर यान चलाया जाना -- मोटर यान को चलाते समय या चलाने का प्रयत्न करते समय--

(क) जिस किसी के रक्त में किसी श्वास विश्लेषक [या किसी अन्य परीक्षण जिसके अंतर्गत प्रयोगशाला परीक्षण भी है], द्वारा परीक्षण किए जाने पर रक्त के प्रति 100 मिली लीटर में 30 मिली ग्राम से अधिक एल्कोहल पाया जाता है, या

(ख) जो कोई मादक द्रव्य के असर में इस सीमा तक है कि वह मोटर यान पर समुचित नियंत्रण रखने में असमर्थ है,

वह प्रथम अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या [दस हजार रुपए के जुर्माने से, अथवा दोनों से तथा पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या [पन्द्रह हजार रुपए] के जुर्माने से, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

स्पष्टीकरण -- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “मादक द्रव्य" पद से “अल्कोहल, प्राकृतिक या कृत्रिम से भिन्न कोई मद्य या कोई अन्य प्राकृतिक सामग्री या कोई लवण या ऐसे पदार्थ या सामग्री की निर्मिति अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए और इसके अंतर्गत स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61) की धारा 2 के खंड (xiv) और खंड (xxiii) में यथा परिभाषित स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ भी हैं ।]



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