Section 184 Motor Vehicles Act, 1988

 


Section 184 Motor Vehicles Act, 1988 in Hindi and English



Section 184 of MV Act 1988 :- Driving dangerously -- Whoever drives a motor vehicle at a speed or in a manner which is dangerous to the public [or which causes a sense of alarm or distress to the occupants of the vehicle, other road users, and persons near roads], having regard to all the circumstances of the case including the nature, condition and use of the place where the vehicle is driven and the amount of traffic which actually is at the time or which might reasonably be expected to be in the place, shall be punishable for the first offence with imprisonment for a term [which may extend to one year but shall not be less than six months or with fine which shall not be less than one thousand rupees but may extend to five thousand rupees, or with both], and for any second or subsequent offence if committed within three years of the commission of a previous similar offence with imprisonment for a term which may extend to two years, or with fine [of ten thousand rupees], or with both.


Explanation.-- For the purpose of this section,--

(a) jumping a red light;

(b) violating a stop sign;

(c) use of handheld communications devices while driving;

(d) passing or overtaking other vehicles in a manner contrary to law;

(e) driving against the authorised flow of traffic; or

(f) driving in any manner that falls far below what would be expected of a competent and careful driver and where it would be obvious to a competent and careful driver that driving in that manner would be dangerous.

shall amount to driving in such manner which is dangerous to the public.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 184 of Motor Vehicles Act, 1988:

The State Of Arunachal Pradesh vs Ramchandra Rabidas @ Ratan on 4 October, 2019

S.Rajaseekaran vs Union Of India & Ors on 22 April, 2014

S.Rajaseekaran vs Union Of India & Ors on 22 April, 1947

M.C. Mehta vs Union Of India & Ors. Etc on 20 November, 1997

Ravi Kapur vs State Of Rajasthan on 16 August, 2012

Paramjit Bhasin And Ors vs Union Of India And Ors on 9 November, 2005

Multani Hanifbhai Kalubhai vs State Of Gujarat & Anr on 1 February, 2013



मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 184 का विवरण :  -  खतरनाक तरीके से मोटर यान चलाना -- जो कोई मोटर यान को ऐसी गति से या ऐसे तरीके से चलाएगा जो मामले की उन सब परिस्थितियों को, जिनके अन्तर्गत उस स्थान का स्वरूप, हालत और उपयोग भी है, जहां वह यान चलाया जा रहा है तथा उस स्थान में यातायात के परिमाण को जो वास्तव में उस समय है या जिसके होने की युक्तियुक्त रूप से प्रत्याशा की जा सकती है, ध्यान में रखते हुए साधारण जनता के लिए खतरनाक है [या जो यान के अधिभोगियों, अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं और सड़कों के निकट व्यक्तियों को चेतावनी या करस्थम का बोध कराता है], वह प्रथम अपराध पर कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी किंतु जो छह मास से कम की नहीं होगी या ऐसे जुर्माने से, जो एक हजार रुपए से कम नहीं होगा किन्तु पांच हजार रुपए तक हो सकेगा या दोनों से], और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए उस दशा में, जिसमें कि वैसे ही पूर्ववर्ती अपराध के किए जाने के तीन वर्ष के अन्दर किया गया है, कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या दस हजार रुपए के जुर्माने से, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

स्पष्टीकरण -- इस धारा के प्रयोजनों के लिए :-

(क) लाल बत्ती को पार करना;

(ख) स्टॉप साइन का उल्लंघन करना;

(ग) गाड़ी चलाते समय हाथ में रखी संसूचना युक्तियों का प्रयोग;

(घ) विधि के विरुद्ध किसी रीति में अन्य यानों के पास से गुजरना या उनसे आगे निकलना;

(ङ) यातायात के प्राधिकृत प्रवाह के विरुद्ध चालन करना;

(च) किसी ऐसी रीति में गाड़ी चलाना, जो उससे बहुत कम है जिसकी किसी सक्षम और सावधान चालक से अपेक्षा की जाएगी और जहां किसी सक्षम और सावधान चालक को यह स्पष्ट होगा कि उस रीति में गाड़ी चलाना खतरनाक होगा,

से ऐसी रीति में चलाना, जो पब्लिक के लिए खतरनाक हैं, अभिप्रेत होगा ।



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