Section 165 CrPC

 

Section 165 CrPC in Hindi and English



Section 165 of CrPC 1973 :- 165. Search by police officer --(1) Whenever an officer in charge of police station or a police officer making an investigation has reasonable grounds for believing that anything necessary for the purposes of an investigation into any offence which he is authorised to investigate may be found in any place within the limits of the police station of which he is in charge, or to which he is attached and that such thing cannot in his opinion be otherwise obtained without undue delay, such officer may, after recording in writing the grounds of his belief and specifying in such writing, so far as possible, the thing for which search is to be made, search, or cause search to be made, for such thing in any place within the limits of such station.

(2) A police officer proceeding under sub-section (1), shall, if practicable, conduct the search in person.

(3) If he is unable to conduct the search in person and there is no other person competent to make the search present at the time, he may, after recording in writing his reasons for so doing, require any officer subordinate to him to make the search and he shall deliver to such subordinate officer an order in writing, specifying the place to be searched and so far as possible, the thing for which search is to be made and such subordinate officer may thereupon search for such thing in such place.

(4) The provisions of this Code as to search-warrants and the general provisions as to searches contained in section 100 shall, so far as may be, apply to a search made under this section.

(5) Copies of any record made under sub-section (1) or sub-section (3) shall forthwith be sent to the nearest Magistrate empowered to take cognizance to the offence and the owner or occupier of the place searched shall, on application, be furnished, free of cost, with a copy of the same by the Magistrate.




Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 165 of Criminal Procedure Code 1973:

State Of Punjab vs Balbir Singh on 1 March, 1994

The State Of Rajasthan vs Rehman on 14 October, 1959

Tofan Singh vs The State Of Tamil Nadu on 29 October, 2020

The Commissioner Of Commercial vs R. S. Jhaver And Others Etc on 9 August, 1967

Delhi Administration vs Ram Singh on 3 May, 1961

State Of Punjab vs Baldev Singh on 21 July, 1999

The State Of Punjab vs Baldev Singh on 21 July, 1999

Bai Radha vs State Of Gujarat on 20 November, 1968

Commissioner Of Commercial Taxes vs Ramkishan Shrikishan Jhaver And  on 9 August, 196

Lal Singh vs State Of Gujarat & Anr on 9 January, 2001




दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 165 का विवरण :  -  165. पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी -- (1) जब कभी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी या अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी के पास यह विश्वास करने के उचित आधार हैं कि किसी ऐसे अपराध के अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह प्राधिकृत है, आवश्यक कोई चीज उस पुलिस थाने की, जिसका वह भारसाधक है या जिससे वह संलग्न है, सीमाओं के अन्दर किसी स्थान में पाई जा सकती है और उसकी राय में ऐसी चीज अनुचित विलम्ब के बिना तलाशी से अन्यथा अभिप्राप्त नहीं की जा सकती, तब ऐसा अधिकारी अपने विश्वास के आधारों को लेखबद्ध करने, और यथासंभव उस चीज को, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, ऐसे लेख में विनिर्दिष्ट करने के पश्चात् उस थाने की सीमाओं के अन्दर किसी स्थान में ऐसी चीज के लिए तलाशी ले सकता है या तलाशी लिवा सकता है।

(2) उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि साध्य है तो, तलाशी स्वयं लेगा।

(3) यदि वह तलाशी स्वयं लेने में असमर्थ है और कोई अन्य ऐसा व्यक्ति, जो तलाशी लेने के लिए सक्षम है, उस समय उपस्थित नहीं है तो वह ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात्, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से अपेक्षा कर सकता है कि वह तलाशी ले और ऐसे अधीनस्थ अधिकारी को ऐसा लिखित आदेश देगा जिसमें उस स्थान को जिसकी तलाशी ली जानी है, और यथासंभव उस चीज को, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, विनिर्दिष्ट किया जाएगा और तब ऐसा अधीनस्थ अधिकारी उस चीज के लिए तलाशी उस स्थान में ले सकेगा।

(4) तलाशी वारण्टों के बारे में इस संहिता के उपबंध और तलाशियों के बारे में धारा 100 के साधारण उपबंध इस धारा के अधीन ली जाने वाली तलाशी को, जहाँ तक हो सके, लागू होंगे।

(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी भी अभिलेख की प्रतियाँ तत्काल ऐसे निकटतम मजिस्ट्रेट के पास भेज दी जाएंगी, जो उस अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त है और जिस स्थान की तलाशी ली गई है, उसके स्वामी या अधिभोगी को, उसके आवेदन पर, उसकी एक प्रतिलिपि मजिस्ट्रेट द्वारा निःशुल्क दी जाएगी।



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