Section 146 CrPC

 Section 146 CrPC in Hindi and English



Section 146 of CrPC 1973 :- 146. Power to attach subject of dispute and to appoint receiver - (1) If the Magistrate at any time after making the order under sub-section (1) of section 145 considers the case to be one of emergency, or if he decides that none of the parties was then in such possession as is referred to in section 145, or if he is unable to satisfy himself as to which of them was then in such possession of the subject of dispute, he may attach the subject of dispute until a competent Court has determined the rights of the parties thereto with regard to the person entitled to the possession thereof :

Provided that such Magistrate may withdraw the attachment at any time if he is satisfied that there is no longer any likelihood of breach of the peace with regard to the subject of dispute.

(2) When the Magistrate attaches the subject of dispute, he may, if no receiver in relation to such subject of dispute has been appointed by any Civil Court, make such arrangements as he considers proper for looking after the property or if he thinks fit, appoint a receiver thereof, who shall have, subject to the control of the Magistrate, all the powers of a receiver appointed under the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908) :

Provided that in the event of a receiver being subsequently appointed in relation to the subject of dispute by any Civil Court, the Magistrate :

(a) shall order the receiver appointed by him to hand over the possession of the subject of dispute to the receiver appointed by the Civil Court and shall thereafter discharge the receiver appointed by him;

(b) may make such other incidental or consequential orders as may be just.



Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 146 of Criminal Procedure Code 1973:

Mathuralal vs Bhawarlal & Anr on 13 September, 1979

Chandrasekhar Singh & Ors vs Siya Ram Singh & Ors on 26 September, 1978

Shanti Kumar Panda vs Shakutala Devi on 3 November, 2003

Dharampal And Ors vs Smt. Ramshri And Ors on 7 January, 1993

Ashok Kumar vs State Of Uttarakhand & Ors on 13 December, 2012

Satish Chander Ahuja vs Sneha Ahuja on 15 October, 2020

Chandu Naik & Ors vs Sita Ram B. Naik & Anr on 6 December, 1977

Ramchandra Aggarwal And Anr vs State Of Uttar Pradesh & Anr on 5 May, 1966

M.P.Peter vs State Of Kerala & Ors on 11 May, 2009

Ram Khilona & Ors vs Sardar & Ors on 16 July, 2002



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 146 का विवरण :  -  146. विवाद की विषयवस्तु की कुर्क करने की और रिसीवर नियुक्त करने की शक्ति -- (1) यदि धारा 145 की उपधारा (1) के अधीन आदेश करने के पश्चात् किसी समय मजिस्ट्रेट मामले को आपातिक समझता है अथवा यदि वह विनिश्चय करता है कि पक्षकारों में से किसी का धारा 145 में यथानिर्दिष्ट कब्जा उस समय नहीं था, अथवा यदि वह अपना समाधान नहीं कर पाता है कि उस समय उनमें से किसका ऐसा कब्जा विवाद की विषयवस्तु पर था तो वह विवाद की विषयवस्तु को तब तक के लिए कुर्क कर सकता है जब तक कोई सक्षम न्यायालय उसके कब्जे का हकदार व्यक्ति होने के बारे में उसके पक्षकारों के अधिकारों का अवधारण नहीं कर देता है :

परन्तु यदि ऐसे मजिस्ट्रेट का समाधान हो जाता है कि विवाद की विषयवस्तु के बारे में परिशांति भंग होने की कोई संभाव्यता नहीं रही तो वह किसी समय भी कुर्की वापस ले सकता है।

(2) जब मजिस्ट्रेट विवाद की विषयवस्तु को कुर्क करता है तब यदि ऐसी विवाद की विषयवस्तु के संबंध में कोई रिसीवर किसी सिविल न्यायालय द्वारा नियुक्त नहीं किया गया है तो, वह उसके लिए ऐसा इंतजाम कर सकता है जो वह उस संपत्ति की देखभाल के लिए उचित समझता है अथवा यदि वह ठीक समझता है तो, उसके लिए रिसीवर नियुक्त कर सकता है जिसको मजिस्ट्रेट के नियंत्रण के अधीन रहते हुए वे सब शक्तियाँ प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन रिसीवर की होती है :

परन्तु यदि विवाद की विषयवस्तु के संबंध में कोई रिसीवर किसी सिविल न्यायालय द्वारा बाद में नियुक्त कर दिया जाता है तो मजिस्ट्रेट :

(क) अपने द्वारा नियुक्त रिसीवर को आदेश देगा कि वह विवाद की विषयवस्तु का कब्जा सिविल न्यायालय द्वारा नियुक्त रिसीवर को दे दे और तत्पश्चात् वह अपने द्वारा नियुक्त रिसीवर को उन्मोचित कर देगा;

(ख) ऐसे अन्य आनुषांगिक या पारिणामिक आदेश कर सकेगा जो न्यायसंगत हैं।



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