Section 121 CrPC

 Section 121 CrPC in Hindi and English

Section 121 of CrPC 1973 :- 121. Power to reject sureties - (1) A Magistrate may refuse to accept any surety offered, or may reject any surety previously accepted by him or his predecessor under this Chapter on the ground that such surety is an unfit person for the purposes of the bond :

       Provided that, before so refusing to accept or rejecting any such surety, he shall either himself hold an enquiry on oath into the fitness of the surety, or cause such inquiry to be held and a report to be made thereon by a Magistrate subordinate to him.

(2) Such Magistrate shall, before holding the inquiry, give reasonable notice to the surety and to the person by whom the surety was offered and shall, in making the inquiry, record the substance of the evidence adduced before him.

(3) If the Magistrate is satisfied, after considering the evidence so adduced either before him or before, a Magistrate deputed under sub-section (1) and the report of such Magistrate (if any), that the surety is an unfit person for the purposes of the bond, he shall make an order refusing to accept or rejecting, as the case may be, such surety and recording his reasons for so doing :

     Provided that, before making an order rejecting any surety who has previously been accepted, the Magistrate shall issue his summons or warrant, as he thinks fit and cause the person for whom the surety is bound to appear or to be brought before him.

Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 121 of Criminal Procedure Code 1973:

Madhu Limaye vs Sub-Divisional Magistrate, on 28 October, 1970

Shyam Deo Pandey & Ors vs State Of Bihar on 23 March, 1971

Md.Ajmal Md.Amir Kasab @Abu vs State Of Maharashtra on 29 August, 2012

Umarmia Alias Mamumia vs State Of Gujarat on 1 February, 2017

दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 121 का विवरण :  -  121. प्रतिभुओं को अस्वीकार करने की शक्ति -- (1) मजिस्ट्रेट किसी पेश किए गए प्रतिभू को स्वीकार करने से इंकार कर सकता है या अपने द्वारा, या अपने पूर्ववर्ती द्वारा, इस अध्याय के अधीन पहले स्वीकार किए गए किसी प्रतिभू को इस आधार पर अस्वीकार कर सकता है कि ऐसा प्रतिभू बंधपत्र के प्रयोजनों के लिए अनुपयुक्त व्यक्ति है :

              परन्तु किसी ऐसे प्रतिभू को इस प्रकार स्वीकार करने से इंकार करने या उसे अस्वीकार करने के पहले वह प्रतिभू की उपयुक्तता के बारे में या तो स्वयं शपथ पर जांच करेगा या अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट से ऐसी जांच और उसके बारे में रिपोर्ट करवाएगा।

(2) ऐसा मजिस्ट्रेट जांच करने के पहले प्रतिभू को और ऐसे व्यक्ति को, जिसने वह प्रतिभू पेश किया है, उचित सूचना देगा और जांच करने में अपने सामने दिए गए साक्ष्य के सार को अभिलिखित करेगा।

(3) यदि मजिस्ट्रेट को अपने समक्ष या उपधारा (1) के अधीन प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष ऐसे दिए गए साक्ष्य पर और ऐसे मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर (यदि कोई हो), विचार करने के पश्चात् समाधान हो जाता है कि वह प्रतिभू बंधपत्र के प्रयोजनों के लिए अनुपयुक्त व्यक्ति है तो वह उस प्रतिभू को यथास्थिति, स्वीकार करने से इंकार करने का या उसे अस्वीकार करने का आदेश करेगा और ऐसा करने के लिए अपने कारण अभिलिखित करेगा : 

            परन्तु किसी प्रतिभू को, जो पहले स्वीकार किया जा चुका है, अस्वीकार करने का आदेश देने के पहले मजिस्ट्रेट अपना समन या वारण्ट, जिसे वह ठीक समझे, जारी करेगा और उस व्यक्ति को, जिसके लिए प्रतिभू आबद्ध है, अपने समक्ष हाजिर कराएगा या बुलवाएगा।

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