Section 41 CrPC

Section 41 CrPC in Hindi and English


Section 41 of CrPC 1973 :- 41. When police may arrest without warrant – (1) Any police officer may without an order from a Magistrate and without a warrant, arrest any person : 


(a) who commits, in the presence of a police officer, a cognizable offence;

(b) against whom a reasonable complaint has been made, or credible information has been received, or a reasonable suspicion exists that he has committed a cognizable offence punishable with imprisonment for a term which may be less than seven years or which may extend to seven years whether with or without fine, if the following conditions are satisfied, namely :(i) the police officer has reason to believe on the basis of such complaint, information, or suspicion that such person has committed the said offence;

(ii) the police officer is satisfied that such arrest is necessary

(a) to prevent such person from committing any further offence; or

(b) for proper investigation of the offence; or 

(c) to prevent such person from causing the evidence of the offence to disappear or tampering with such evidence in any manner; or

(d) to prevent such person from making any inducement, threat or promise to any person acquainted with the facts of the case so as to dissuade him from disclosing such facts to the Court or to the police officer; or

(e) as unless such person is arrested, his presence in the Court whenever or required cannot be ensured; and the police officer shall record while making such arrest, his reasons in writing.

[Provided that a police officer shall, in all cases where the arrest of a person is not required under the provisions of this sub-section, record the reasons in writing for not making the arrest.]

(ba) against whom credible information has been received that he has committed a cognizable offence punishable with imprisonment for a term which may extend to more than seven years whether with or without fine or with death sentence and the police officer has reason to believe on the basis of that information that such person has committed the said offence;]

(c) who has been proclaimed as an offender either under this Code or by order of the State Government; or

(d) in whose possession anything is found which may reasonably be suspected to be stolen property and who may reasonably be suspected of having committed an offence with reference to such thing; or

(e) who obstructs a police officer while in the execution of his duty, or who has escaped, or attempts to escape, from lawful custody; or

(f) who is reasonably suspected of being a deserter from any of the Armed Forces of the Union; or

(g) who has been concerned in, or against whom a reasonable complaint has been made, or credible information has been received, or a reasonable suspicion exists, of his having been concerned in, any act committed at any place out of  India which, if committed in India, would have been punishable as an offence and for which he is, under any law relating to extradition, or otherwise, liable to be apprehended or detained in custody in India; or

(h) who, being a released convict, commits a breach of any rule made under subsection (5) of section 356; or

(i) for whose arrest any requisition, whether written or oral, has been received from another police officer, provided that the requisition specifies the person to be arrested and the offence or other cause for which the arrest is to be made and it appears therefrom that the person might lawfully be arrested without a warrant by the officer who issued the requisition.

(2) Subject to the provisions of section 42, no person concerned in a non-cognizable offence or against whom a complaint has been made or credible information has been received or a reasonable suspicion exists of his having so concerned, shall be arrested except under a warrant or order of a Magistrate.


Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 1 of Criminal Procedure Code 1973:

Social Action Forum vs Union Of India And Ors. Minstry Law on 14 September, 2018

Union Of India vs Ashok Kumar Sharma on 28 August, 2020

The Commissioner Of Commercial vs R. S. Jhaver And Others Etc on 9 August, 1967

Arnesh Kumar vs State Of Bihar & Anr on 2 July, 2014

Dr. Subhash Kashinath Mahajan vs The State Of Maharashtra on 20 March, 2018

Bhavesh Jayanti Lakhani vs State Of Maharashtra & Ors on 7 August, 2009

Rampal Pithwa Rahidas And Ors. vs State Of Maharashtra on 1 March, 1989

Dr. Rini Johar & Anr. vs State Of M.P.&Ors.; on 3 June, 2016

Gautam Navlakha vs National Investigation Agency on 12 May, 2021

Rampal Pithwa Rahidas vs State Of Maharashtra on 1 March, 1994



दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 41 का विवरण :  -  41. पुलिस वारण्ट के बिना कब गिरफ्तार कर सकेगी -- (1) कोई पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना और वारण्ट के बिना किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है 


(क) जो किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में संज्ञेय अपराध कारित करता है;

(ख) जिसके विरुद्ध कोई युक्तियुक्त परिवाद किया गया है, या कोई विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई है, या युक्तियुक्त संदेह विद्यमान है कि उसने ऐसी अवधि के कारावास से दण्डनीय संज्ञेय अपराध कारित किया है जो सात वर्ष से कम की हो सकती है या जो सात वर्ष तक की हो सकती है चाहे जुर्माने सहित हो या जुर्माने के बिना, यदि निम्नलिखित शर्तों का समाधान कर दिया जाता है, अर्थात् :

(i) ऐसे परिवाद, सूचना या संदेह के आधार पर पुलिस अधिकारी का यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति ने उक्त अपराध कारित किया है;

(ii) पुलिस अधिकारी का समाधान हो गया है कि ऐसी गिरफ्तारी आवश्यक है। 

(क) ऐसे व्यक्ति को ऐसे और किसी अपराध को कारित करने से निवारित करने के लिए; या

(ख) अपराध के उचित अन्वेषण के लिए; या

(ग) ऐसे व्यक्ति को अपराध के साक्ष्य को मिटाने या ऐसे साक्ष्य से किसी ढंग से छेड़-छाड़ करने से निवारित करने के लिए; या

(घ) ऐसे व्यक्ति को मामले के तथ्यों से परिचित किसी व्यक्ति को प्रलोभन देने, धमकी देने या वायदा करने से निवारित करने के लिए ताकि ऐसा व्यक्ति ऐसे तथ्यों को न्यायालय या पुलिस अधिकारी को प्रकट न करे: या

(ङ) क्योंकि जब तक ऐसा व्यक्ति गिरफ्तार नहीं किया जाता, उसकी न्यायालय में उपस्थिति जब , कभी भी अपेक्षित हो, सुनिश्चित नहीं की जा सकती; और पुलिस अधिकारी ऐसी गिरफ्तारी करते समय, अपने कारणों को लिखित में अभिलिखित करेगा।

[परन्तु यह कि कोई पुलिस अधिकारी, उन समस्त मामलों में जहाँ इस उपधारा के उपबंधों के अधीन किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपेक्षित नहीं है, तो गिरफ्तार न करने के लिये लिखित में कारण अभिलिखित करेगा।]

(खक) जिसके विरुद्ध विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई है कि उसने ऐसा संज्ञेय अपराध कारित किया है जो ऐसी अवधि के कारावास से दण्डनीय है जो जुर्माने सहित या जुर्माने के बिना सात वर्ष से अधिक तक या मृत्यु दण्ड का हो सकेगा तथा पुलिस अधिकारी का ऐसी सूचना के आधार पर यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति ने उक्त अपराध कारित किया है।

(ग) जो या तो इस संहिता के अधीन या राज्य सरकार के आदेश द्वारा अपराधी उद्घोषित किया जा चुका है; अथवा

(घ) जिसके कब्जे में कोई ऐसी चीज पाई जाती है जिसके चुराई हुई सम्पत्ति होने का उचित रूप से सन्देह किया जा सकता है और जिस पर ऐसी चीज के बारे में अपराध करने का उचित रूप से सन्देह किया जा सकता है; अथवा

(ङ) जो पुलिस अधिकारी को उस समय बाधा पहुँचाता है जब वह अपना कर्तव्य कर रहा है, या जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है या निकल भागने का प्रयत्न करता है; अथवा

(च) जिस पर संघ के सशस्त्र बलों में से किसी से अभियाजक होने का उचित सन्देह है।

(छ) जो भारत से बाहर किसी स्थान में किसी ऐसे कार्य किए जाने से, जो यदि भारत में किया गया होता तो में अपराध के रूप में दण्डनीय होता, और जिसके लिए वह प्रत्यर्पण सम्बन्धी किसी विधि के अधीन या अन्यथा भारत में पकड़े जाने का या अभिरक्षा में निरुद्ध किए जाने का भागी है, संबद्ध रह चुका है या  जिसके विरुद्ध इस बारे में उचित परिवाद किया जा चुका है या विश्वसनीय इत्तिला प्राप्त हो चुकी है या उचित सन्देह विद्यमान है कि वह ऐसे सम्बद्ध रह चुका है; अथवा

(ज) जो छोड़ा गया सिद्धदोष होते हुए धारा 356 की उपधारा (5) के अधीन बनाए गए किसी नियम को भंग करता है; अथवा

(झ) जिसकी गिरफ्तारी के लिए किसी अन्य पुलिस अधिकारी से लिखित या मौखिक अध्यपेक्षा प्राप्त हो चुकी है, परन्तु यह तब जब कि अध्यपेक्षा में उस व्यक्ति का, जिसे गिरफ्तार किया जाना है, और उस अपराध का या अन्य कारण का, जिसके लिए गिरफ्तारी की जानी है, विनिर्देश है और उससे यह दर्शित होता है कि अध्यपेक्षा जारी करने वाले अधिकारी द्वारा वारण्ट के बिना वह व्यक्ति विधिपूर्वक गिरफ्तार किया जा सकता था।

(2) धारा 42 के उपबंधों के अध्यधीन, कोई व्यक्ति जो किसी असंज्ञेय अपराध से संबंधित है या जिसके विरुद्ध परिवाद किया गया है या विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई है या इस प्रकार उसके संबंधित होने का युक्तियुक्त संदेह विद्यमान है, को मजिस्ट्रेट के वारंट या आदेश के सिवाय गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।



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