कोर्ट पत्रों और टेलीग्रामों को भी रीट याचिका समझ उसपर कार्यवाही कर सकता है

 प्रश्न - कुछ मामलों में कोर्ट पत्रों और टेलीग्रामों को भी रीट याचिका समझ उसपर कार्यवाही कर सकता है ?

 उत्तर - जी हां | यदि भेजने वाले व्यक्ति ने वह कार्य जनता की भलाई के लिए किया हो या जनहित के लिए हो | जहां समाज के कमजोर वर्गों का सवाल हो जैसे कि विचाराधीन कैदी जो जेलों में  बिना विचारण के सड  रहे हो, आगरा के संरक्षण गृह के निवासी या अजमेर जिले में सड़क निर्माण कार्य में लगे हरिजन मजदूर जो अत्यंत गरीबी और दुर्दशा की स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं और कड़ी मेहनत के बावजूद भी असहाय जीवन जीने के लिए मजबूर हैं जो समाज में शोषण का शिकार हैं और न्याय तक पहुंचने में असमर्थ हैं वहां कोर्ट उन लोक हितेषी  व्यक्तियों से जो ऐसे लोगों के लिए  राहत कार्य में लगे हो उनसे नियमित रूप से पेश की जाने वाली रिट याचिका दायर करने के लिए आग्रह नहीं करेगा | यह कोर्ट ऐसे व्यक्तियों द्वारा लिखे गए पत्र पर भी तुरंत कार्यवाही करेगा जो जनता की भलाई के लिए है या लोकहित  के लिए है | मोहन लाल शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य सरकार( 1989(2) SCC600) के मामले में याचक ने कोर्ट को टेलीग्राम द्वारा सूचित किया कि उसके पुत्र की पुलिस द्वारा अभी रक्षा मैं हत्या की जा चुकी है | इसे रिट याचिका मानकर कोर्ट ने सी.बी.आई को निर्देश दिया कि वह इस मामले की पूर्ण रूप से जांच करें |

प्रश्न०  पत्र याचिकाओं के बारे में सर्वोच्च न्यायालय के 5 सदस्यों वाले बेंच ने 1987 में एम सी मेहता बनाम भारत राज्य संघ में क्या निर्णय दिया? 

उ०  इस मामले में( देखें AlR 1987 sc1087) कोर्ट ने कहा भारत वर्ष में गरीब तथा निर्धन लोग अपने मौलिक अधिकारों को लागू करवाने हेतु सर्वोच्च न्यायालय के किसी भी न्यायाधीश को पत्र द्वारा आवेदन कर सकते हैं | इस पत्र के साथ एफिडेविट या शपथ पत्र संलग्न  करना आवश्यक नहीं है | क्योंकि गरीब व असहाय व्यक्ति जिन्हें शायद कोर्ट की समझ आवेदन करने की पद्धति ज्ञात  ना हो वह सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने की कड़ी प्रक्रिया न समझ पाए, न ही वह कड़े नियमों का पालन कर पाए तब वाह न्यायालय तक पहुंच से वंचित रह जाएंगे | वे केवल किसी विशेष न्यायाधीश को ही जानते होंगे जो उसी प्रदेश से आए हो इसीलिए वे उन्हें पत्र द्वारा संबोधित कर सकते हैं |


प्रश्न०  पत्र याचिकाओं द्वारा न्यायालय के दुरूपयोग को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा क्या सुझाव दिए गए? 

उ०  न्यायालय ने न्यायाधीशों को इसके दुरूपयोग की संभावना से सावधान रहने को कहा | उसने कहा कि कोर्ट को उसकी शक्तियों के दुरूपयोग से सावधान करना होगा | उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस प्रकार के सभी पत्र संपूर्ण न्यायालय को संबोधित होने चाहिए न की किसी विशेष न्यायाधीश को और इस पर तभी विचार करना चाहिए  जब याचक द्वारा प्रदान किए गए विवरण एवं तथ्यों की पुष्टि हो जाए |


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