Section 98 The Trade Marks Act, 1999

 


Section 98 The Trade Marks Act, 1999: 

Appearance of Registrar in legal proceedings.—

(1) The Registrar shall have the right to appear and be heard—

(a) in any legal proceedings before the Appellate Board in which the relief sought includes alteration or rectification of the register or in which any question relating to the practice of the Trade Marks Registry is raised;

(b) in any appeal to the Board from an order of the Registrar on an application for registration of a trade mark—

(i) which is not opposed, and the application is either refused by the Registrar or is accepted by him subject to any amendments, modifications, conditions or limitations, or

(ii) which has been opposed and the Registrar considers that his appearance is necessary in the public interest, and the Registrar shall appear in any case if so directed by the Board.

(2) Unless the Appellate Board otherwise directs, the Registrar may, in lieu of appearing, submit a statement in writing signed by him, giving such particulars as he thinks proper of the proceedings before him relating to the matter in issue or of the grounds of any decision given by him affecting it, or of the practice of the Trade Marks Registry in like cases, or of other matters relevant to the issues and within his knowledge as Registrar, and such statement shall be evidence in the proceeding.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 98 The Trade Marks Act, 1999: 


Mount Everest Mineral Water Ltd. vs Bisleri International Pvt. Ltd. &  on 22 February, 2010

Anand Bansal vs Shiva Tobacco Company And Anr. on 2 June, 2006

General Manager (H), Hazaribagh vs Anjan Banerjee And Anr. on 22 August, 1989

General Manager (H) Hazari Bagh  vs Anjan Banerjee And Anr. on 22 August, 1989

Shri Anand Bansal, Sole vs Shiva Tobacco Co. And Registrar Of on 16 November, 2006


व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा  98 का विवरण : 

विधिक कार्यवाहियों में रजिस्ट्रार का उपसंजात होना-(1) रजिस्ट्रार को-

(क) अपील बोर्ड के समक्ष किन्हीं ऐसी विधिक कार्यवाहियों में उपसंजात होने और सुने जाने का अधिकार होगा, जिनमें अपेक्षित अनुतोष के अंतर्गत रजिस्टर में परिवर्तन या उसका परिशोधन है या जिनमें व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की प्रथा से संबंधित कोई प्रश्न उद्भूत हुआ है;

(ख) किसी व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के आवेदन पर रजिस्ट्रार के आदेश के विरुद्ध बोर्ड को की गई किसी ऐसी अपील में उपसंजात होने और सुने जाने का अधिकार होगा-

(i) जिसका विरोध नहीं किया गया है, और आवेदन को रजिस्ट्रार द्वारा नामंजूर कर दिया गया है या उसके द्वारा किन्हीं संशोधन, उपांतरणों, शर्तों या मर्यादाओं के अधीन रहते हुए स्वीकार किया गया है, या

(ii) जिसका विरोध किया गया है और रजिस्ट्रार समझता है कि उसकी उपसंजाति लोकहित में आवश्यक है,

और रजिस्ट्रार किसी मामले में उपसंजात होगा यदि बोर्ड द्वारा ऐसा निदेश दिया जाए ।

(2) जब तक कि अपील बोर्ड अन्यथा निदेश न दे, रजिस्ट्रार, उपसंजात होने के बदले अपने द्वारा हस्ताक्षरित लिखित रूप में एक कथन प्रस्तुत कर सकेगा, जिसमें वह विवाद्यक विषय से संबंधित उसके समक्ष कार्यवाहियों के या उससे प्रभावित होने वाले उसके द्वारा दिए गए किसी विनिश्चय के आधारों के या उसी प्रकार के मामलों में व्यापार चिह्न रजिस्ट्री की प्रथा के या विवाद्यकों से सुसंगत किसी अन्य विषय के संबंध में जो रजिस्ट्रार के रूप में उसकी जानकारी में है, उसके संबंध में ऐसी विशिष्टियां देगा जो वह उचित समझे और ऐसा कथन कार्यवाही में साक्ष्य होगा ।


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