Section 30 Arbitration and Conciliation Act, 1996

 


Section 30  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Settlement.—

(1) It is not incompatible with an arbitration agreement for an arbitral tribunal to encourage settlement of the dispute and, with the agreement of the parties, the arbitral tribunal may use mediation, conciliation or other procedures at any time during the arbitral proceedings to encourage settlement.

(2) If, during arbitral proceedings, the parties settle the dispute, the arbitral tribunal shall terminate the proceedings and, if requested by the parties and not objected to by the arbitral tribunal, record the settlement in the form of an arbitral award on agreed terms.

(3) An arbitral award on agreed terms shall be made in accordance with section 31 and shall state that it is an arbitral award.

(4) An arbitral award on agreed terms shall have the same status and effect as any other arbitral award on the substance of the dispute.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 30  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Haresh Dayaram Thakur vs State Of Maharashtra And Ors on 5 May, 2000

Visa International Ltd vs Continental Resources (Usa)Ltd on 2 December, 2008

Narayan Prasad Lohia vs Nikunj Kumar Lohia And Others on 28 January, 2003




माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 30 का विवरण : 

समझौता-(1) माध्यस्थम् अधिकरण के लिए, विवाद के समझौते को प्रोत्साहित करना, माध्यस्थम् करार से बेमेल नहीं है और पक्षकारों की सहमति से, माध्यस्थम् अधिकरण, समझौता प्रोत्साहित करने के लिए माध्यस्थम् कार्यवाहियों के दौरान, किसी समय मध्यस्थता, सुलह या अन्य प्रक्रियाओं का प्रयोग कर सकता है ।

(2) यदि माध्यस्थम् कार्यवाहियों के दौरान, पक्षकार विवाद तय करते हैं तो माध्यस्थम् अधिकरण, कार्यवाहियों का समापन करेगा और यदि, पक्षकारों द्वारा अनुरोध किया जाए और माध्यस्थम् अधिकरण उसके लिए आक्षेप न करे, तो करार पाए गए निबंधनों पर समझौते को माध्यस्थम् पंचाट के रूप में अभिलिखित करेगा ।

(3) करार पाए गए निबंधनों पर माध्यस्थम् पंचाट धारा 31 के अनुसार दिया जाएगा और उसमें यह अभिकथित होगा कि वह माध्यस्थम् पंचाट है ।

(4) करार पाए गए निबंधनों पर माध्यस्थम् पंचाट की वही प्रास्थिति होगी और उसका वही प्रभाव होगा, जो विवाद के सार पर किसी अन्य माध्यस्थम्  पंचाट का होता है ।



To download this dhara / Section of  Arbitration and Conciliation Act, 1996 in pdf format use chrome web browser and use keys [Ctrl + P] and save as pdf.

Comments

Popular posts from this blog

संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख | Characteristics of the Constitution of India

100 Questions on Indian Constitution for UPSC 2020 Pre Exam

भारतीय संविधान से संबंधित 100 महत्वपूर्ण प्रश्न उतर