Section 32 Arbitration and Conciliation Act, 1996

 

Section 32  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Termination of proceedings.—

(1) The arbitral proceedings shall be terminated by the final arbitral award or by an order of the arbitral tribunal under sub-section (2).

(2) The arbitral tribunal shall issue an order for the termination of the arbitral proceedings where—

(a) the claimant withdraws his claim, unless the respondent objects to the order and the arbitral tribunal recognises a legitimate interest on his part in obtaining a final settlement of the dispute,

(b) the parties agree on the termination of the proceedings, or

(c) the arbitral tribunal finds that the continuation of the proceedings has for any other reason become unnecessary or impossible.

(3) Subject to section 33 and sub-section (4) of section 34, the mandate of the arbitral tribunal shall terminate with the termination of the arbitral proceedings.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 32 Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Jay Engineering Works Ltd vs Industry Facilitation Council on 14 September, 2006

State Of Maharashtra & Ors vs M/S. Ark Builders Pvt.Ltd on 28 February, 2011

M/S Duro Felguera S.A vs M/S. Gangavaram Port Limited on 10 October, 2017

Cheran Propertiees Limited vs Kasturi And Sons Limited on 24 April, 2018

Dakshin Haryana Bijli Vitran vs M/S Navigant Technologies Pvt. on 2 March, 2021




माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 32 का विवरण : 

 कार्यवाहियों का समापन-(1) माध्यस्थम् कार्यवाहियों का समापन, अंतिम माध्यस्थम् पंचाट द्वारा या उपधारा (2)      के अधीन माध्यस्थम् अधिकरण के आदेश द्वारा होगा ।

(2) माध्यस्थम् अधिकरण, माध्यस्थम् कार्यवाहियों के समापन का वहां आदेश देगा, जहां-

(क) दावेदार अपने दावे को, जब तक कि प्रत्यर्थी आदेश पर आक्षेप नहीं करता है और विवाद का अंतिम परिनिर्धारण अभिप्राप्त करने में, माध्यस्थम् अधिकरण उसके विधिसम्मत हितों को मान्यता नहीं देता है, प्रत्याहृत कर लेता है ;

(ख) पक्षकार कार्यवाहियों के समापन के लिए सहमत हो जाते हैं ; या

(ग) माध्यस्थम् अधिकरण का यह निष्कर्ष है कि कार्यवाहियों का जारी रखना, अन्य किसी कारण से अनावश्यक या असंभव हो गया है ।


(3) धारा 33 और धारा 34 की उपधारा (4) के अधीन रहते हुए, माध्यस्थम् अधिकरण की समाज्ञा का, माध्यस्थम् कार्यवाहियों के समापन के साथ, अंत हो जाएगा ।



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