Section 45 Arbitration and Conciliation Act, 1996

 


Section 45  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Power of judicial authority to refer parties to arbitration. —Notwithstanding anything contained in Part I or in the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908), a judicial authority, when seized of an action in a matter in respect of which the parties have made an agreement referred to in section 44, shall, at the request of one of the parties or any person claiming through or under him, refer the parties to arbitration, unless it finds that the said agreement is null and void, inoperative or incapable of being performed.




Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 45  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 




माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 45 का विवरण : 

पक्षकारों को माध्यस्थम् के लिए निर्दिष्ट करने की न्यायिक प्राधिकारी की शक्ति-भाग 1 में, या सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में किसी बात के होते हुए भी, जबकि किसी ऐसे विषय के बारे में जिसके संबंध में धारा 44 में निर्दिष्ट पक्षकारों ने कोई करार किया है किसी न्यायिक प्राधिकारी के हाथ में मामला चला गया हो, तब वह न्यायालय पक्षकारों में से किसी भी पक्षकार या उसकी मार्फत या उससे व्युत्पन्न अधिकार के अधीन दावा करने वाले किसी व्यक्ति के निवेदन पर पक्षकारों को माध्यस्थम् के लिए उस दशा में ही निर्देशित करेगा जब कि उसका यह निष्कर्ष होता है कि उक्त करार अकृत और शून्य है, अप्रवर्तनशील है या पालन किए जाने के योग्य नहीं है ।



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