Section 92 The Trade Marks Act, 1999


Section 92 The Trade Marks Act, 1999: 

Procedure and powers of Appellate Board.—

(1) The Appellate Board shall not be bound by the procedure laid down in the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908) but shall be guided by principles of natural justice and subject to the provisions of this Act and the rules made thereunder, the Appellate Board shall have powers to regulate its own procedure including the fixing of places and times of its hearing.

(2) The Appellate Board shall have, for the purpose of discharging its functions under this Act, the same powers as are vested in a civil court under the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908) while trying a suit in respect of the following matters, namely:—

(a) receiving evidence;

(b) issuing commissions for examination of witnesses;

(c) requisitioning any public record; and

(d) any other matter which may be prescribed.

(3) Any proceeding before the Appellate Board shall be deemed to be a judicial proceeding within the meaning of sections 193 and 228, and for the purpose of section 196, of the Indian Penal Code (45 of 1860), and the Appellate Board shall be deemed to be a civil court for all the purposes of section 195 and Chapter XXVI of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974).

Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 92 The Trade Marks Act, 1999: 

Ram Kishore vs State Of U.P on 28 March, 1966

व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 92 का विवरण : 

 अपील बोर्ड की प्रक्रिया और शक्तियां-(1) अपील बोर्ड, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में अधिकथित प्रक्रिया से आबद्ध नहीं होगा किन्तु नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शित होगा और इस अधिनियम तथा तद्धीन बनाए गए नियमों के ऐसे उपबंधों के अध्यधीन होगा । अपील बोर्ड को अपनी प्रक्रिया को, जिसके अंतर्गत सुनवाई का स्थान और समय नियत करना भी है, विनियमित करने की शक्ति होगी ।

(2) अपील बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए वही शक्तियां होंगी जो निम्नलिखित विषयों की बाबत किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय में निहिती होती हैं, अर्थात्: -

(क) साक्ष्य ग्रहण करना ;

(ख) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;

(ग) किसी लोक अभिलेख की अध्यपेक्षा करना; और

(घ) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाए ।

(3) अपील बोर्ड के समक्ष कोई कार्यवाही, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में और धारा 196 के प्रयोजन के लिए न्यायिक कार्यवाही समझी जाएगी और अपील बोर्ड को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के सभी प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।

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