Section 7 Arbitration and Conciliation Act, 1996

 


Section 7  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Arbitration agreement. —

(1) In this Part, “arbitration agreement” means an agreement by the parties to submit to arbitration all or certain disputes which have arisen or which may arise between them in respect of a defined legal relationship, whether contractual or not.

(2) An arbitration agreement may be in the form of an arbitration clause in a contract or in the form of a separate agreement.

(3) An arbitration agreement shall be in writing.

(4) An arbitration agreement is in writing if it is contained in—

(a) a document signed by the parties;

(b) an exchange of letters, telex, telegrams or other means of telecommunication which provide a record of the agreement; or

(c) an exchange of statements of claim and defence in which the existence of the agreement is alleged by one party and not denied by the other.

(5) The reference in a contract to a document containing an arbitration clause constitutes an arbitration agreement if the contract is in writing and the reference is such as to make that arbitration clause part of the contract.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 7  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Indus Biotech Private Limited vs Kotak India Venture (Offshore)  on 26 March, 2021

M/S. Silpi Industries vs Kerala State Road Transport  on 29 June, 2021




माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 7 का विवरण : 

माध्यस्थम् करार-(1) इस भाग में माध्यस्थम् करार" से पक्षकारों द्वारा ऐसे सभी या कतिपय विवाद माध्यस्थम् के लिए निवेदित करने के लिए किया गया करार अभिप्रेत है जो परिनिश्चित विधिक संबंध, चाहे संविदात्मक हो या न हो, की बाबत उनके बीच उद्भूत हुए हों या हो सकते हों ।

(2) माध्यस्थम् करार, किसी संविदा में माध्यस्थम् खंड के रूप में या किसी पृथक् करार के रूप में हो सकता है ।

(3) माध्यस्थम् करार लिखित रूप में होगा ।

(4) माध्यस्थम् करार लिखित रूप में है यदि वह,-

(क) पक्षकारों द्वारा हस्ताक्षरित किसी दस्तावेज में ;

(ख) पत्रों के आदान-प्रदान, टेलेक्स, तार या दूरसंचार के ऐसे अन्य साधनों में, जो करार के अभिलेख की व्यवस्था करते हैं, या

(ग) दावे और प्रतिरक्षा के कथनों के आदान-प्रदान में, जिनमें करार की विद्यमानता का एक पक्षकार द्वारा अभिकथन किया गया है और दूसरे पक्षकार द्वारा उससे इंकार नहीं किया गया है ,

अंतर्विष्ट है ।

(5) माध्यस्थम् खंड वाले किसी दस्तावेज के प्रति किसी संविदा में निर्देश, माध्यस्थम् करार का गठन करेगा यदि संविदा लिखित रूप में है और निर्देश ऐसा है जो उस माध्यस्थम् खंड को संविदा का भाग बनाता है ।



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