Section 4 Arbitration and Conciliation Act, 1996

 


Section 4  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Waiver of right to object. —A party who knows that—

(a) any provision of this Part from which the parties may derogate, or

(b) any requirement under the arbitration agreement, has not been complied with and yet proceeds with the arbitration without stating his objection to such non-compliance without undue delay or, if a time limit is provided for stating that objection, within that period of time, shall be deemed to have waived his right to so object.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 4  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Indus Towers Limited Havings Its vs Sow. Ashatai Bapurao Kagne on 18 November, 2015

Bhuwalka & Sons vs Baljit Securities Limited on 20 May, 2011

M/S. Anuptech Equipments Private vs M/S. Ganpati Co-Op. Housing  on 30 January, 1999

Indus Towers Limited Havings Its vs Sow. Ashatai Bapurao Kagne on 18 November, 2015


माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 4 का विवरण : 

आपत्ति करने के अधिकार का अधित्यजन-कोई पक्षकार, जो यह जानता है कि-

(क) इस भाग के ऐसे किसी उपबंध का, जिसे पक्षकार अल्पीकृत कर सकते हैं, या

(ख) माध्यस्थम् करार के अधीन किसी अपेक्षा का,अनुपालन नहीं किया गया है और फिर भी असम्यक् विलंब के बिना या यदि आपत्ति का कथन करने के लिए किसी कालावधि का उपबंध किया गया है तो उस कालावधि के भीतर ऐसे अननुपालन के लिए अपनी आपत्ति का कथन किए बिना माध्यस्थम् के लिए अग्रसर होता है, उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने इस प्रकार आपत्ति करने के अपने अधिकार का अधित्यजन कर दिया है ।



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