Section 3 Arbitration and Conciliation Act, 1996

 


Section 3  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Receipt of written communications.—

(1) Unless otherwise agreed by the parties,—

(a) any written communication is deemed to have been received if it is delivered to the addressee personally or at his place of business, habitual residence or mailing address, and

(b) if none of the places referred to in clause (a) can be found after making a reasonable inquiry, a written communication is deemed to have been received if it is sent to the addressee’s last known place of business, habitual residence or mailing address by registered letter or by any other means which provides a record of the attempt to deliver it.

(2) The communication is deemed to have been received on the day it is so delivered.

(3) This section does not apply to written communications in respect of proceedings of any judicial authority.


Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 3  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

M/S Modern Industries vs M/S Steel Auth.Of India  on 15 April, 2010

Indus Biotech Private Limited vs Kotak India Venture (Offshore)  on 26 March, 2021

Dinesh Chandra Pandey vs High Court Of M.P. & Anr on 8 July, 2010

Bharat Broadband Network Limited vs United Telecoms Limited on 16 April, 2019




माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 3 का विवरण :  लिखित संसूचनाओं की प्राप्ति-(1) जब तक कि पक्षकारों द्वारा अन्यथा करार न किया गया हो,-

(क) कोई लिखित संसूचना प्राप्त की गई समझी जाएगी यदि वह प्रेषिती को व्यक्तिगत रूप से या उसके कारबार के स्थान, आभ्यासिक निवास या डाक के पते पर, परिदत्त की जाती है ; और

(ख) यदि खंड (क) में निर्दिष्ट स्थानों में से कोई भी युक्तियुक्त जांच करने के पश्चात् नहीं पाया जाता है तो कोई लिखित संसूचना प्राप्त की गई समझी जाएगी यदि प्रेषिती के अंतिम ज्ञात कारबार के स्थान, आभ्यासिक निवास या डाक के पते पर रजिस्ट्रीकृत पत्र द्वारा या ऐसे किसी अन्य साधन द्वारा, जो उसे परिदत्त किए जाने का प्रयास करने के अभिलेख की व्यवस्था करता है, भेजी जाती है ।

(2) संसूचना उस दिन प्राप्त की गई समझी जाएगी जिस दिन वह इस प्रकार परिदत्त की जाती है ।

(3) यह धारा किसी न्यायिक प्राधिकारी की कार्यवाहियों के संबंध में लिखित संसूचनाओं को लागू नहीं होती है ।



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