Section 28 Arbitration and Conciliation Act, 1996

  

Section 28  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Rules applicable to substance of dispute.—

(1) Where the place of arbitration is situate in India,—

(a) in an arbitration other than an international commercial arbitration, the arbitral tribunal shall decide the dispute submitted to arbitration in accordance with the substantive law for the time being in force in India;

(b) in international commercial arbitration,—

(i) the arbitral tribunal shall decide the dispute in accordance with the rules of law designated by the parties as applicable to the substance of the dispute;

(ii) any designation by the parties of the law or legal system of a given country shall be construed, unless otherwise expressed, as directly referring to the substantive law of that country and not to its conflict of laws rules;

(iii) failing any designation of the law under clause (a) by the parties, the arbitral tribunal shall apply the rules of law it considers to be appropriate given all the circumstances surrounding the dispute.

(2) The arbitral tribunal shall decide ex aequo et bono or as amiable compositeur only if the parties have expressly authorised it to do so.

(3) In all cases, the arbitral tribunal shall decide in accordance with the terms of the contract and shall take into account the usages of the trade applicable to the transaction.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 28  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Sanshin Chemicals Industry vs Orientals Carbons And Chemicals on 16 February, 2001

Bhatia International vs Bulk Trading S. A. & Anr on 13 March, 2002

Hindustan Zinc Ltd vs Friends Coal Carbonisation on 4 April, 2006

Dakshin Haryana Bijli Vitran  vs M/S Navigant Technologies Pvt. on 2 March, 2021

Bharat Sanchar Nigam Ltd.& Anr vs Motorola India Pvt.Ltd on 15 September, 2008

M/S.J.G.Engineers Pvt.Ltd vs Union Of India & Anr on 28 April, 2011

N.B.C.C.Ltd vs J.G.Engineering Pvt.Ltd on 5 January, 2010




माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 28 का विवरण : 

विवाद के सार को लागू नियम-(1) जहां माध्यस्थम् का स्थान भारत में स्थित है, -

(क) किसी अन्तरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् से भिन्न माध्यस्थम् में, माध्यस्थम् अधिकरण, माध्यस्थम् के लिए सौंपे गए विवाद का विनिश्चय, भारत में तत्समय प्रवृत्त मूल विधि के अनुसार करेगा;

(ख) अन्तरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम् में,

(i) माध्यस्थम् अधिकरण, विवाद का विनिश्चय विवाद के सार को लागू, पक्षकारों द्वारा अभिहित विधि के नियमों के अनुसार करेगा;

(ii) पक्षकारों द्वारा किसी देश विशेष की विधि या विधिक प्रणाली के किसी अभिद्यान का, जब तक कि अन्यथा अभिव्यक्त न हो, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह प्रत्यक्षतः उस देश की मौलिक विधि के प्रति न कि उसके विधि-संघर्ष नियमों के प्रति निर्देश है;

(iii) पक्षकारों द्वारा खंड (क) के अधीन विधि का कोई अभिधान न करने पर माध्यस्थम् अधिकरण, उस विधि के नियमों को लागू करेगा जिसे वह विवाद की सभी विद्यमान परिवर्ती परिस्थितियों में समुचित समझे ।

(2) माध्यस्थम् अधिकरण, उसके अनुसार जो न्यायसंगत और ठीक हो, के अनुसार या सुलहकर्ता के रूप में केवल तभी विनिश्चय करेगा जब पक्षकारों ने उसे इस प्रकार करने के लिए अभिव्यक्त रूप से प्राधिकृत किया हो ।

(3) सभी मामलों में, माध्यस्थम् अधिकरण, संविदा के निबंधनों के अनुसार विनिश्चय करेगा और संव्यवहार को लागू व्यापार की प्रथाओं को ध्यान में रखेगा ।



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