Section 24 Arbitration and Conciliation Act, 1996


Section 24  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Hearings and written proceedings.—

(1) Unless otherwise agreed by the parties, the arbitral tribunal shall decide whether to hold oral hearings for the presentation of evidence or for oral argument, or whether the proceedings shall be conducted on the basis of documents and other materials: Provided that the arbitral tribunal shall hold oral hearings, at an appropriate stage of the proceedings, on a request by a party, unless the parties have agreed that no oral hearing shall be held.

(2) The parties shall be given sufficient advance notice of any hearing and of any meeting of the arbitral tribunal for the purposes of inspection of documents, goods or other property.

(3) All statements, documents or other information supplied to, or applications made to the arbitral tribunal by one party shall be communicated to the other party, and any expert report or evidentiary document on which the arbitral tribunal may rely in making its decision shall be communicated to the parties.

Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 24  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

M/S. Silpi Industries vs Kerala State Road Transport ... on 29 June, 2021

Supreme Court of India Cites 53 - Cited by 0 - Full Document

Hindustan Zinc Ltd vs Friends Coal Carbonisation on 4 April, 2006

Supreme Court of India Cites 14 - Cited by 55 - Full Document

Visa International Ltd vs Continental Resources (Usa)Ltd on 2 December, 2008

माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 24 का विवरण : 

सुनवाई और लिखित कार्यवाहियां-(1) जब तक कि पक्षकारों द्वारा अन्यथा करार न किया गया हो, माध्यस्थम् अधिकरण, यह विनिश्चय करेगा कि क्या साक्ष्य की प्रस्तुति के लिए मौखिक सुनवाई की जाए या मौखिक बहस की जाए या क्या कार्यवाहियां दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर संचालित की जाएंगी :

परंतु माध्यस्थम् अधिकरण, किसी पक्षकार द्वारा अनुरोध किए जाने पर कार्यवाहियों के उचित प्रक्रम पर मौखिक सुनवाई करेगा जब तक कि पक्षकारों द्वारा यह करार न किया गया हो कि कोई मौखिक सुनवाई नहीं की जाएगी ।

(2) पक्षकारों को किसी सुनवाई की या दस्तावेजों, माल या अन्य संपत्ति के निरीक्षण के प्रयोजनों के लिए माध्यस्थम् अधिकरण की किसी बैठक की पर्याप्त अग्रिम सूचना दी जाएगी ।

(3) किसी एक पक्षकार द्वारा माध्यस्थम् अधिकरण को दिए गए सभी कथन, दस्तावेज या अन्य जानकारी को अथवा किए गए आवेदनों को दूसरे पक्षकार को संसूचित किया जाएगा और कोई विशेषज्ञ रिपोर्ट या साक्ष्यिक दस्तावेज, जिस पर माध्यस्थम् अधिकरण अपना विनिश्चय करने में निर्भर रह सकता है, पक्षकारों को संसूचित किया जाएगा ।

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