Section 16 Arbitration and Conciliation Act, 1996


Section 16  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Competence of arbitral tribunal to rule on its jurisdiction.—

(1) The arbitral tribunal may rule on its own jurisdiction, including ruling on any objections with respect to the existence or validity of the arbitration agreement, and for that purpose,—

(a) an arbitration clause which forms part of a contract shall be treated as an agreement independent of the other terms of the contract; and

(b) a decision by the arbitral tribunal that the contract is null and void shall not entail ipso jure the invalidity of the arbitration clause.

(2) A plea that the arbitral tribunal does not have jurisdiction shall be raised not later than the submission of the statement of defence; however, a party shall not be precluded from raising such a plea merely because that he has appointed, or participated in the appointment of, an arbitrator.

(3) A plea that the arbitral tribunal is exceeding the scope of its authority shall be raised as soon as the matter alleged to be beyond the scope of its authority is raised during the arbitral proceedings.

(4) The arbitral tribunal may, in either of the cases referred to in sub-section (2) or sub-section (3), admit a later plea if it considers the delay justified.

(5) The arbitral tribunal shall decide on a plea referred to in sub-section (2) or sub-section (3) and, where the arbitral tribunal takes a decision rejecting the plea, continue with the arbitral proceedings and make an arbitral award.

(6) A party aggrieved by such an arbitral award may make an application for setting aside such an arbitral award in accordance with section 34.

Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 16  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Quippo Construction Equipment  vs Janardan Nirman Pvt. Ltd on 29 April, 2020

A. Ayyasamy vs A. Paramasivam & Ors on 4 October, 2016

Secur Industries Ltd vs M/S Godrej & Boyce Mfg. Co. Ltd. & on 26 February, 2004

M/S Deep Industries Ltd. vs Oil And Natural Gas Corporation on 28 November, 2019

Wellington Associates Ltd. vs Mr. Kirit Mehta on 4 April, 2000

Antrix Corp.Ltd vs Devas Multimedia P.Ltd on 10 May, 2013

Jay Engineering Works Ltd vs Industry Facilitation Council on 14 September, 2006

M/S. Gas Authority Of India Ltd. vs M/S. Keti Construction (I) Ltd.  on 11 May, 2007

Arasmeta Captive Power Co. Pvt. vs Lafarge India P. Ltd on 12 December, 2013

M/S Duro Felguera S.A vs M/S. Gangavaram Port Limited on 10 October, 2017

माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 16 का विवरण : 

माध्यस्थम् अधिकरण की अपनी अधिकारिता के बारे में विनिर्णय करने की सक्षमता-(1) माध्यस्थम् अधिकरण, अपनी अधिकारिता के बारे में स्वयं विनिर्णय कर सकेगा, जिसके अंतर्गत माध्यस्थम् करार की विद्यमानता या विधिमान्यता की बाबत किसी आक्षेप पर विनिर्णय भी है और उस प्रयोजन के लिए,-

(क) कोई माध्यस्थम् खंड, जो किसी संविदा का भागरूप है, संविदा के अन्य निबंधनों से स्वतंत्र किसी करार के रूप में माना जाएगा, और

(ख) माध्यस्थम् अधिकरण का ऐसा कोई विनिश्चय कि संविदा अकृत और शून्य है, माध्यस्थम् खंड को विधितः अविधिमान्य नहीं करेगा ।

(2) यह अभिवाक् कि माध्यस्थम् अधिकरण को अधिकारिता नहीं है, प्रतिरक्षा का कथन प्रस्तुत किए जाने के पश्चात् नहीं किया जाएगा; तथापि, कोई पक्षकार, केवल इस कारण यह अभिवाक् करने से निवारित नहीं किया जाएगा कि उसने किसी मध्यस्थ को नियुक्त किया है या उसकी नियुक्ति में भाग लिया है ।

(3) यह अभिवाक् कि माध्यस्थम् अधिकरण अपने प्राधिकरण की परिधि का अतिक्रमण कर रहा है, यथाशीघ्र जैसे ही मामला, उसके प्राधिकार की परिधि से परे अधिकथित किया जाता है, माध्यस्थम् कार्यवाहियों के दौरान किया जाएगा ।

(4) माध्यस्थम् अधिकरण उपधारा (2) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट मामलों में से किसी में भी परवर्ती अभिवाक् को, यदि वह विलम्ब को न्यायोचित समझता है तो, ग्रहण कर सकता है ।

(5) माध्यस्थम् अधिकरण, उपधारा (2) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी अभिवाक् पर विनिश्चय करेगा और जहां माध्यस्थम् अधिकरण, अभिवाक् को नामंजूर करने का विनिश्चय करता है वहां वह माध्यस्थम् कार्यवाहियों को जारी रखेगा और माध्यस्थम् पंचाट देगा ।

(6) ऐसे किसी माध्यस्थम् पंचाट से व्यथित कोई पक्षकार ऐसे किसी माध्यस्थम् पंचाट को अपास्त करने के लिए धारा 34 के अनुसार आवेदन कर सकेगा ।

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