Section 151 The Trade Marks Act, 1999

 


 Section 151 The Trade Marks Act, 1999: 

Savings in respect of certain matters in Chapter XII.—Nothing in Chapter XII shall—

(a) exempt any person from any suit or other proceeding which might, but for anything in that Chapter, be brought against him; or

(b) entitle any person to refuse to make a complete discovery, or to answer any question or interrogatory in any suit or other proceeding, but such discovery or answer shall not be admissible in evidence against such person in any such prosecution for an offence under that Chapter or against clause (h) of section 112 of the Customs Act, 1962 (52 of 1962), relating to confiscation of goods under clause (d) of section 111 of that Act and notified by the Central Government under clause (n) of sub-section (2) of section 11 thereof for the protection of trade marks relating to import of goods; or

(c) be construed so as to render liable to any prosecution or punishment any servant of a master resident in India who in good faith acts in obedience to the instructions of such master, and, on demand made by or on behalf of the prosecutor, has given full information as to his master and as to the instructions which he has received from his master.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 151 The Trade Marks Act, 1999: 

Raja Soap Factory And Others vs S. P. Shantharaj And Others on 20 January, 1965

R.K. Products vs Kothari Products Ltd. on 15 April, 2004

M/S. Bhatia Plastics vs M/S. Peacock Industries Ltd. And  on 4 July, 1994

Om Prakash Gupta vs Parveen Kumar And Anr. on 19 May, 2000

Jayaram Banan vs Gurcharan Singh Chndhok on 19 September, 1994



व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 की धारा 151 का विवरण : 

अध्याय 12 के कतिपय विषयों की बाबत व्यावृत्ति-अध्याय 12 की किसी बात में-

(क) किसी व्यक्ति को किसी वाद या अन्य कार्यवाही से छूट नहीं मिलेगी जो, यदि उस अध्याय में ऐसी कोई बात न होती तो उसके विरुद्ध लाई जा सकती थी; या

(ख) किसी व्यक्ति को यह हक नहीं होगा कि वह किसी वाद या अन्य कार्यवाही में पूर्ण प्रकटीकरण करने या किसी प्रश्न या परिप्रश्न का उत्तर देने से इंकार कर दे, किंतु ऐसा प्रकटीकरण या उत्तर इस अध्याय के अधीन या सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 112 के खंड (ज) के संबंध में, जो उस अधिनियम की धारा 111 के खंड (घ) के अधीन माल के अधिहरण से संबंधित है और माल के आयात से संबंधित व्यापार चिह्न के संरक्षण के लिए उसकी धारा 11 की उपधारा (2) के खंड (ढ) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित है, किसी अपराध के लिए किसी अभियोजन में ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध साक्ष्य में ग्राह्य नहीं होगा ; या

(ग) यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि भारत में निवासी मालिक का कोई सेवक, जिसने ऐसे मालिक के अनुदेशों के पालन में सद्भावपूर्वक कार्य किया है और अभियोजन द्वारा या उसकी ओर से मांग की जाने पर अपने मालिक के संबंध में और उन अनुदेशों के संबंध में, जो उसे अपने मालिक से मिले थे, पूरी जानकारी दे दी है, उससे किसी अभियोजन या दंड के दायित्वाधीन हो जाए ।



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