Section 15 Arbitration and Conciliation Act, 1996

 


Section 15  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

Termination of mandate and substitution of arbitrator.—

(1) In addition to the circumstances referred to in section 13 or section 14, the mandate of an arbitrator shall terminate—

(a) where he withdraws from office for any reason; or

(b) by or pursuant to agreement of the parties.

(2) Where the mandate of an arbitrator terminates, a substitute arbitrator shall be appointed according to the rules that were applicable to the appointment of the arbitrator being replaced.

(3) Unless otherwise agreed by the parties, where an arbitrator is replaced under sub-section (2), any hearings previously held may be repeated at the discretion of the arbitral tribunal.

(4) Unless otherwise agreed by the parties, an order or ruling of the arbitral tribunal made prior to the replacement of an arbitrator under this section shall not be invalid solely because there has been a change in the composition of the arbitral tribunal.



Supreme Court of India Important Judgments And Leading Case Law Related to Section 15  Arbitration and Conciliation Act, 1996: 

N.B.C.C.Ltd vs J.G.Engineering Pvt.Ltd on 5 January, 2010

Shailesh Dhairyawan vs Mohan Balkrishna Lulla on 16 October, 2015

M/S Deep Trading Company vs M/S Indian Oil Corporation & Ors on 22 March, 2013

Bharat Broadband Network Limited vs United Telecoms Limited on 16 April, 2019

M/S. Silpi Industries vs Kerala State Road Transport  on 29 June, 2021

Deutsche Postbank Home Fin.Ltd vs Taduri Sridhar & Anr on 29 March, 2011

Antrix Corp.Ltd vs Devas Multimedia P.Ltd on 10 May, 2013

Grid Corporation Of Orissa Ltd. vs Aes Corporation And Ors. on 1 October, 2002




माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 15 का विवरण : 

आदेश की समाप्ति और मध्यस्थ का प्रतिस्थापन-(1) धारा 13 या धारा 14 में निर्दिष्ट परिस्थितियों के साथ-साथ किसी मध्यस्थ का आदेश-

(क) जहां वह किसी कारण से अपने पद से हट जाता है, या

(ख) पक्षकारों के करार द्वारा या उसके अनुसरण में,समाप्त हो जाएगा ।

(2) जहां किसी मध्यस्थ का आदेश समाप्त हो जाता है वहां प्रतिस्थानी मध्यस्थ, उन नियमों के अनुसार, जो प्रतिस्थापित होने वाले मध्यस्थ की नियुक्ति को लागू थे, नियुक्त किया जाएगा ।

(3) जब तक कि पक्षकारों द्वारा अन्यथा करार न किया गया हो, जहां कोई मध्यस्थ उपधारा (2) के अधीन प्रतिस्थापित किया जाता है वहां पहले की गई कोई सुनवाई माध्यस्थम् अधिकरण के विवेकानुसार पुनः की जा सकेगी ।

(4) जब तक कि पक्षकारों द्वारा अन्यथा करार न किया गया हो, इस धारा के अधीन किसी मध्यस्थ के प्रतिस्थापन के पूर्व माध्यस्थम् अधिकरण द्वारा किया गया कोई आदेश या विनिर्णय केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगा कि माध्यस्थम् अधिकरण की संरचना में कोई परिवर्तन हुआ है ।



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